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सर्वकोश
श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

Shri Hanuman Chalisa with Mahaviri Commentary

गोस्वामी तुलसीदास (व्याख्याकार: स्वामी रामचन्द्रदास 'महावीर') द्वारा

DevanagariHindipublished110 पृष्ठ

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महावीरी व्याख्या चौ. ३२: राम-रसायन तुम्हरे पासा
॥ श्रीराम ॥
मूल (चौपाई)—
राम-रसायन तुम्हरे पासा।
सादर हौ रघुपति के दासा ॥ ३२ ॥
शब्दार्थ—राम-रसायन ▸ श्रीरामरसका भाण्डागार (भण्डार)।
अर्थ—हे पवननन्दन! रामप्रेमरसका भण्डार आपके ही पास है एवं
आप निरन्तर आदरपूर्वक रघुपति श्रीरामभद्रजूके दास्य भावमें रहते हैं।
यद्वा, हे आदरणीय रघुपति श्रीरामभद्रजूके दास हनुमान्जी! आपके पास
रामप्रेमरसका भवन अर्थात् राघवचरित्र निरन्तर निवास करता है।
व्याख्या—श्रीहनुमान्‌जी रामभक्ति-रसके आचार्य ही हैं। अत एव इन्होंने
श्रीराघवसे अनपायनी भक्ति माँगी—
नाथ भगति तव अति सुखदायिनि।
देहु कृपा करि सो अनपायनि ॥
—रा.च.मा. ५-३४-३
इन्हें गोस्वामीजीने रसाइनी (संस्कृत: रसायनी) शब्दसे संबोधित किया है।
यथा—राम की रजाइ तें रसाइनी समीरसूनू (क. ५-२५)।
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