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सर्वकोश
श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

Shri Hanuman Chalisa with Mahaviri Commentary

गोस्वामी तुलसीदास (व्याख्याकार: स्वामी रामचन्द्रदास 'महावीर') द्वारा

DevanagariHindipublished110 पृष्ठ

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पृष्ठ 86

चौ. ३३: तुम्हरे भजन राम को पावै महावीरी व्याख्या
॥ श्रीराम ॥
मूल (चौपाई)—
तुम्हरे भजन राम को पावै।
जनम जनम के दुख बिसरावै ॥ ३३ ॥
शब्दार्थ— भजन ▸ सेवा, शरणागति।
अर्थ— हे कपिकुल-तिलक! आपके भजनसे साधक श्रीरामभद्रजूको पा
जाता है और प्रभुको पाकर वह अनेक जन्मोंके दुःखोंको भूल जाता है।
व्याख्या— आपका भजन भगवत्प्राप्तिमें साधन है क्योंकि भगवद्भक्ति
दर्शनके लिए ज्ञान और वैराग्य इन दो नेत्रोंकी आवश्यकता होती है।
यथा—ज्ञान बिराग नयन उरगारी (रा.च.मा. ७-१२०-१४)। और आप
स्वयं ज्ञान-वैराग्य-रूप हैं। यथा—ज्ञानिनामग्रगण्यम् (रा.च.मा. ५-
मङ्गलाचरण श्लोक ३) और बिरागी पवनकुमार सो (क. ५-१)। अतः
आञ्जनेयके भजनसे निश्चित श्रीरामरूपकी प्राप्ति हो जाती है। राघव सुखसिन्धु
हैं, अतः उन्हें प्राप्त कर व्यक्ति अनेक जन्मोंके दुःखोंको उन्हीं आनन्द-
सिन्धुकी एक लहरमें विलीन कर देता है, जैसे जटायु—निरखि राम
छबि-धाम मुख बिगत भई सब पीर (रा.च.मा. ३-३२)।
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