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सर्वकोश
श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

Shri Hanuman Chalisa with Mahaviri Commentary

गोस्वामी तुलसीदास (व्याख्याकार: स्वामी रामचन्द्रदास 'महावीर') द्वारा

DevanagariHindipublished110 पृष्ठ

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चौ. २७: सब-पर राम राय-सिरताजा महावीरी व्याख्या
॥ श्रीराम ॥
मूल (चौपाई)—
सब-पर राम राय-सिरताजा।
तिन के काज सकल तुम साजा॥ २७ ॥
शब्दार्थ—सब-पर ▸ सर्वोपरि। सब-पर शब्द सर्वपरका तद्भव है। यहाँ
सर्वत्र लवराम् (प्रा.प्र. ३-३) इस प्राकृत व्याकरण के सूत्रसे रका लोप
हुआ।
अर्थ—श्रीराम परब्रह्म और राजाओंके मुकुटमणि हैं। उनके भी संपूर्ण
कार्योंको आपने ही संपन्न किया।
व्याख्या—श्रीरामजी सर्वोपरि हैं। यथा—
शंभु बिरंचि बिष्णु भगवाना।
उपजहिं जासु अंश ते नाना॥
—रा.च.मा. १-१४४-६
अर्थात् श्रीराम राजाधिराज हैं फिर भी उनके संपूर्ण कार्योंको आपने ही संपन्न
किया। भाव यह है कि सर्वोपरि परब्रह्म राजाधिराज भगवान् श्रीरामको भी
जिनकी निरन्तर अपेक्षा रहती है, तो हम जैसे जीवोंकी उनके बिना कैसी
स्थिति होगी? यथा—
संकट-समाज असमंजस भो रामराज
काज जुग पूगनि को करतल पल भो।
—ह.बा. ६
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