श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)
Shri Hanuman Chalisa with Mahaviri Commentary
गोस्वामी तुलसीदास (व्याख्याकार: स्वामी रामचन्द्रदास 'महावीर') द्वारा
DevanagariHindipublished110 पृष्ठ
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महावीरी व्याख्या चौ. २६: संकट तें हनुमान छुड़ावै
॥ श्रीराम ॥
मूल (चौपाई)—
संकट तें हनुमान छुड़ावै।
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै॥ २६ ॥
शब्दार्थ—संकट ▸ विपत्ति।
अर्थ—जो मन, कर्म, और वचनसे एकाग्र होकर हनुमान्जीको ध्यानमें
ले आते हैं, उन्हें श्रीहनुमान्जी सभी संकटोंसे मुक्त कर देते हैं।
व्याख्या—इनका नाम ही संकटमोचन है। यथा—को नहिं जानत है
जग में कपि संकटमोचन नाम तिहारो (सं.ह.अ. १,२,३,४,५,६,७,८)
और गुण गनत नमत सुमिरत जपत समन सकल संकट बिकट (ह.बा.
१)।
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