श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)
Shri Hanuman Chalisa with Mahaviri Commentary
गोस्वामी तुलसीदास (व्याख्याकार: स्वामी रामचन्द्रदास 'महावीर') द्वारा
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महावीरी व्याख्या चौ. २८: और मनोरथ जो कोइ लावै
॥ श्रीराम ॥
मूल (चौपाई)—
और मनोरथ जो कोइ लावै।
तासु अमित जीवन फल पावै ॥ २८ ॥
शब्दार्थ—मनोरथ ▸ अभिलाषा। अमित ▸ असीम।
अर्थ—हे प्रभो! और जो आपके समक्ष कोई भी मनोरथ लेकर आता
है, उस मनोरथका अपने इसी जीवनमें असीम फल पाता है।
व्याख्या—सोइ अमित जीवन फल पावै यह पाठ माननेपर "वह
व्यक्ति इसी जीवनमें उस इच्छाका असीम फल पा लेता है" अर्थ होगा।
भाव यह है कि मानवकी इच्छाएँ प्रायः पूर्ण नहीं होतीं, यदि होती भी
हैं तो शरीरान्तके पश्चात्। परन्तु हनुमान्जीके समक्ष इसी जीवनमें समस्त
इच्छाएँ पूर्ण हो जाती हैं। यथा—नाम कलि-कामतरु केसरी-कुमार को
(ह.बा. ९)।
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