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सर्वकोश
श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

Shri Hanuman Chalisa with Mahaviri Commentary

गोस्वामी तुलसीदास (व्याख्याकार: स्वामी रामचन्द्रदास 'महावीर') द्वारा

DevanagariHindipublished110 पृष्ठ

पृष्ठ 43, कुल 110 में से

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महावीरी व्याख्या चौ. ७: बिद्यावान गुणी अति चतुर
॥ श्रीराम ॥
मूल (चौपाई)—
बिद्यावान गुणी अति चतुर।
राम-काज करिबे को आतुर ॥ ७ ॥
शब्दार्थ— आतुर ▸ उत्सुक।
अर्थ—हे आञ्जनेय! आप समस्त विद्याओंके प्रशस्त भण्डार हैं एवं
समस्त गुण आपमें निवास करते हैं। एवं आप अत्यन्त चतुर हैं तथा
श्रीरामचन्द्रजूके कार्यको करनेके लिए उत्सुक रहा करते हैं।
व्याख्या—बिद्या शब्द यहाँ अष्टादश विद्याओंका संकेत करता है।
जैसा कि ऊपर कहा जा चुका है कि श्रीहनुमान्‌जीने श्रीमानसके धरातलपर
तीन बार ब्राह्मण-वेष बनाया। प्रथम बार श्रीराम-लक्ष्मणके समक्ष। श्रीराम
विद्यानिधि हैं। यथा—बिद्या-बिनय-निपुन गुणशीला (रा.च.मा. १-२०४-
६) और बिद्यानिधि कहूँ बिद्या दीन्ही (रा.च.मा. १-२०९-७)। अतः
विद्यानिधिके समक्ष हनुमान्‌जीने ब्रह्मविषयक प्रश्न करके अपनी विद्या-
प्रखरताका परिचय दिया। द्वितीय बार विभीषणके समक्ष लङ्का में। यहाँ
विभीषणके आकुलत्व रूप गुणको देखकर उन्हें राम-परत्वका उपदेश कर
अपनी गुणज्ञताका परिचय दिया। क्योंकि—
सोइ सर्बग्य गुणी सोइ ग्याता।
सोइ महि मंडित पंडित दाता॥
धर्म-परायन सोइ कुल त्राता।
राम-चरन जा कर मन राता॥
—रा.च.मा. ७-१२७-१,२
आञ्जनेय विभीषणसे कह पड़ते हैं—
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