सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

Shri Hanuman Chalisa with Mahaviri Commentary

गोस्वामी तुलसीदास (व्याख्याकार: स्वामी रामचन्द्रदास 'महावीर') द्वारा

DevanagariHindipublished110 पृष्ठ

पृष्ठ 42, कुल 110 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 42

चौ. ६: शंकर स्वयं केसरीनंदन महावीरी व्याख्या
बिना इस पवित्र तेजको कोई भी अञ्जना तक पहुँचा नहीं सकता था। चूँकि
ये केसरीजीकी पत्नीमें प्रकट हुए, अतः ये केसरी नामक वानरके क्षेत्रज पुत्र
कहलाए। यथा—सकैं न बिलोकि बेष केसरी-कुमार को (क. ५-१२)।
श्रीरामजीने इन्हें वात्सल्य प्रदान किया, अतः ये उनके मानस पुत्र हुए।
यथा—
सुनु सुत तोहि उरिन मैं नाहीं।
देखेउँ करि बिचार मन माहीं॥
—रा.च.मा. ५-३२-७
पौराणिक गाथाओंसे स्पष्ट है कि अञ्जनाकी तपस्यासे प्रसन्न होकर
शिवजीने उनके यहाँ पुत्ररूपमें आनेका वरदान दिया। चूँकि शिवजी
आञ्जनेयके रूपमें अवतीर्ण हुए, अतः स्वयं शब्द पूर्णावतारके ही अर्थमें
व्यवहृत हुआ।
इस प्रकार उपासनाकी दृष्टिसे श्रीआञ्जनेय वायुके औरस पुत्र, ज्ञानकी
दृष्टिसे शिवजीके अभिन्नावतार, कर्मकाण्डकी दृष्टिसे कपिकुलतिलक
केसरीके क्षेत्रज पुत्र, एवं शरणागतिकी दृष्टिसे श्रीराघवके मानस पुत्र हैं।
तेज प्रताप महा जग-बंदन—इनका तेज एवं प्रताप महान् है। यथा—
(१) तेज को निधान मानो कोटिक कृसानु भानु (क. ५-४)।
(२) बेग जीत्यो मारुत प्रताप मारतंड कोटि (क. ५-९)।
प्रचलित प्रतिमें शंकर-सुवन पाठ मिलता है, जो अशुद्ध और अनुचित
है।१
१ देखें: Mahāvīri: Hanumān-Cālīsā Demystified (2018). Translated,
expanded, and annotated by Nityānanda Miśra. New Delhi: Bloomsbury
India, ISBN 978-93-87471-59-7, pp. 68, 169–170—संपादक।
२८