श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)
Shri Hanuman Chalisa with Mahaviri Commentary
गोस्वामी तुलसीदास (व्याख्याकार: स्वामी रामचन्द्रदास 'महावीर') द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंमहावीरी व्याख्या
आमुख
चूडामणि माना जाता है। ठीक यही तथ्य श्रीहनुमान्-चालीसाके विषयमें भी
जानना चाहिए।
श्रीहनुमान्-चालीसाकी श्रीतुलसीदासजीकी रचना होनेके पक्षमें एक और
सशक्त प्रमाण उद्धृत किया जा रहा है। प्रायः गोस्वामीजीके अन्य ग्रन्थोंमें
उनके द्वारा रचित एकमें दूसरे ग्रन्थके कतिपय पद्य उद्धृत देखे जाते हैं। यथा
दोहावलीका प्रथम दोहा (राम बाम दिसि जानकी, दो. १) रामाज्ञाप्रश्न
(रा.प्र. ७-३-७) तथा वैराग्य-संदीपनी (वै.सं. १)में ज्यों-का-त्यों उद्धृत
है। इसी प्रकार श्रीमानसजीके लगभग १०० दोहे और सोरठे यथानुपूर्वी
श्रीदोहावलीमें संगृहीत हैं। उदाहरणके लिए दो-एक देखे जाएँ—
एक छत्र एक मुकुटमनि सब बरनन पर जोउ।
तुलसी रघुबर-नाम के बरन बिराजत दोउ॥
—रा.च.मा. १-२०
यही दोहा दोहावली ग्रन्थका ९वाँ है। बालकाण्डका २७वाँ दोहा
(राम-नाम नरकेसरी) दोहावलीका २६वाँ है। ठीक इसी पद्धतिका
अनुसरण श्रीहनुमान्-चालीसाके प्रारम्भमें किया गया। अयोध्याकाण्डके
प्रथम दोहेका श्रीहनुमान्-चालीसाके मङ्गलाचरणमें प्रस्तुतीकरण ही हनुमान्-
चालीसाको निःसंदिग्ध कर देता है। अयोध्याकाण्डका प्रथम दोहा श्रीगुरु-
चरन-सरोज-रज निज-मन-मुकुर सुधारि इत्यादि ज्यों-का-त्यों हनुमान्-
चालीसाके मङ्गलाचरणके रूपमें सनातन-धर्मावलम्बी आबालवृद्ध जन-
जनके मुखमण्डलपर विराजमान है। अतः—
एतेहु पर करिहैं जे शंका।
मोहि ते अधिक ते जड़ मति-रंका॥
—रा.च.मा. १-१२-८
इत्यलमतिपल्लवितेन।
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