श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)
Shri Hanuman Chalisa with Mahaviri Commentary
गोस्वामी तुलसीदास (व्याख्याकार: स्वामी रामचन्द्रदास 'महावीर') द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंआमुख महावीरी व्याख्या
श्रीहनुमन्बाहुककी भाँति यह छोटे-छोटे मात्र ४३ छन्दोंमें उपनिबद्ध
है। यह परम स्वस्त्ययन स्तोत्ररत्न समस्त ऐहलौकिक एवं पारलौकिक
कामनाओंकी पूर्ति करता है। मैंने भी इसके विधिवत् प्रयोगका सद्यः
फल देखा है। गोस्वामीजीकी ग्रन्थावलीमें संगृहीत न होनेके कारण
आज तक पाश्चात्त्य-वासना-वासित-मनस्क साहित्यिक टीकाकार महानुभावों
द्वारा उपेक्षया इसकी कोई टीका न लिखी जा सकी। कुछ वर्षों पूर्व
श्रीइन्दुभूषण रामायणी द्वारा इसपर एक संक्षिप्त व्याख्या प्रस्तुत की गई।
उसमें भी विषयका यथेष्ट व्यवस्थित प्रस्तुतीकरण नहीं हो पाया। अत एव
गतवर्ष चौद्वार (उड़ीसा) में समायोजित श्रीसंकटमोचन हनुमान्जीके प्रतिष्ठा-
महोत्सवके शुभ-अवसरपर अपने सद्गुरुदेव अनन्तश्रीविभूषित श्री श्री १०८
श्रीरामचरणदासजी महाराज (फलाहारी बाबा सरकार, अरैल, प्रयाग) के
आदेशानुसार मैंने श्रीहनुमन्-चालीसापर लघु व्याख्या प्रस्तुत करनेका बाल-
सुलभ प्रयास किया है। यह कितने अंशोंमें सफल हो पाया है, इसका
आकलन सन्त महानुभाव ही कर सकते हैं; क्योंकि हेम्नः संलक्ष्यते ह्यग्नौ
विशुद्धिः श्यामिकाऽपि वा (र.वं. १-१०)। शास्त्र-स्वाध्यायमें असमर्थता
तथा मानव-स्वभावजन्य-प्रमाद-वशात् यदि कुत्रचित् त्रुटि हो गई हो तो
भगवद्भक्तजन उसे क्षमा करेंगे।
श्रीहनुमन्-चालीसामें कुल ४३ पद हैं, जो दोहा तथा चौपाई छन्दमें
निबद्ध हैं। इसके प्रारम्भमें दो दोहे तथा उपसंहारमें एक दोहा है, शेष
४० चौपाइयाँ हैं। ३२ मात्राओंकी एक पङ्क्तिको एक चौपाई मानकर
प्रत्येक पङ्क्तिको पूर्ण छन्द स्वीकार करके ही उनकी ४० संख्याके
आधारपर ग्रन्थका नाम श्रीहनुमन्-चालीसा रखा गया। ६४ मात्राओंकी
दो-दो पङ्क्तियोंको एक चौपाई मानना भ्रमपूर्ण और अशास्त्रीय है। यदि
दो-दो पङ्क्तियोंको मिलाकर चौपाई होगी तो हनुमन्-चालीसा सिद्ध न
होगा क्योंकि चालीस पङ्क्तियोंमें बीस ही चौपाइयाँ होंगी। इस दृष्टिसे
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