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सर्वकोश
श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

Shri Hanuman Chalisa with Mahaviri Commentary

गोस्वामी तुलसीदास (व्याख्याकार: स्वामी रामचन्द्रदास 'महावीर') द्वारा

DevanagariHindipublished110 पृष्ठ

पृष्ठ 20, कुल 110 में से

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आमुख महावीरी व्याख्या
हरिहरानन्दजी सरस्वती (श्रीकरपात्रीजी महाराज) तो यहाँ तक कहते थे
कि श्रीहनुमान्-चालीसा आर्ष मन्त्रोंकी भाँति ही परमप्रमाण, सर्वशक्तिमान्,
तथा सर्ववाञ्छाकल्पतरु है। यह अवधी भाषामें उपनिबद्ध तैंतालीस छन्दोंमें
लिखा हुआ एक स्तोत्रकाव्य है, जिसे हम गोस्वामीजीकी सिद्ध रचना मानते
हैं। श्रीहनुमान्-चालीसाकी भाषा-शैली गोस्वामीजीके अन्य ग्रन्थोंसे मिलती-
जुलती है। श्रीहनुमान्-चालीसाकी सार्वभौमता एवं सर्वजन-सुलभताको
देखते हुए कोई भी सहृदय सन्त इसे अनार्ष नहीं मान सकता। गोस्वामीजीकी
द्वादश-ग्रन्थावलीके अन्तर्गत इस ग्रन्थका संग्रह न होना कोई विशेष
महत्त्वका नहीं है क्योंकि बहुत-से ऐसे पद श्रीगोस्वामीजीके नामसे मिलते
हैं जिनका संग्रह ग्रन्थावलीमें नहीं है, जबकि उनकी रचना-शैली क्वचित्-
क्वचित् गोस्वामीजीके संगृहीत पदोंसे भी अधिक रुचिकर लगती है। यथा—
ठुमुकि चलत रामचन्द्र बाजत पैजनियाँ॥
किलकि किलकि उठत धाय परत भूमि लटपटाय।
धाय मातु गोद लेत दशरथ की रनियाँ॥
अंचल रज अंग झारि बिबिध भाँति सौं दुलारि।
तन मन धन वारि वारि कहत मृदु बचनियाँ॥
विद्रुम से अरुण अधर बोलत मुख मधुर मधुर।
सुभग नासिका में चारु लटकत लटकनियाँ॥
तुलसिदास अति अनंद देख के मुखारबिंद।
रघुबर-छबि के समान रघुबर-छबि बनियाँ॥
अहो! इस पदमें उपस्थित की हुई राघव सरकारकी यह भुवनमोहन झाँकी
किस सहृदय मनको बालरूप श्रीरामभद्रकी ओर झटिति नहीं खींच लेती!
यह पद अलंकार, रस, भक्ति, तथा संगीतकी दृष्टिसे अनुपम होता हुआ भी
गोस्वामीजीके किसी भी ग्रन्थमें संगृहीत नहीं हो सका, पर ४०० वर्षोंसे चली
आ रही अविच्छिन्न परम्परामें अद्यावधि यह गोस्वामीजीकी गेय रचनाओंका
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