सर्वार्थसिद्धि: तत्त्वार्थसूत्र (आचार्य पूज्यपाद - पं. फूलचन्द्र सिद्धान्तशास्त्री सविस्तार हिन्दी टीका)
Sarvarthasiddhi of Acharya Pujyapada on Tattvartha Sutra with Commentary
आचार्य उमास्वामी / पूज्यपाद (टीकाकार: पं. फूलचन्द्र सिद्धान्तशास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंप्रस्तावना ५५
आचार्य विद्यानन्द इतना ही कहकर नहीं रह गये । वे आप्तपरीक्षा का उपसंहार करते हुए पुनः
कहते हैं—
'श्रीमत्तत्त्वार्थशास्त्रादद्भुतसलिलनिधेरुद्रत्नोद्भवस्य,
प्रोत्थानारम्भकाले सकलमलभिदे शास्त्रकारैः कृतं यत् ।
स्तोत्रं तीर्थोपमानं प्रथितपृथुपथं स्वामिमीमांसितं तत्,
विद्यानन्दैः स्वशक्त्या कथमपि कथितं सत्यवाक्यार्थसिद्धयै ॥१२३॥'
प्रकृष्ट रत्नोंके उद्भवके स्थानभूत श्रीमत्तत्त्वार्थशास्त्ररूपी अद्भुत समुद्रकी रचनाके आरम्भ कालमें
महान् मोक्षपथको प्रसिद्ध करनेवाले और तीर्थोपमस्वरूप जिस स्तोत्रको शास्त्रकारोंने समस्त कर्ममलके भेदन
करनेके अभिप्रायसे रचा है और जिसकी स्वामीने मीमांसा की है उसी स्तोत्रका सत्य वाक्यार्थकी सिद्धिके
लिए विद्यानन्दने अपनी शक्तिके अनुसार किसी प्रकार निरूपण किया है ।
इसी बातको उन्होंने इन शब्दोंमें पुनः दुहराया है—
'इति तत्त्वार्थशास्त्रादौ मुनीन्द्रस्तोत्रगोचरा ।
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