सर्वार्थसिद्धि: तत्त्वार्थसूत्र (आचार्य पूज्यपाद - पं. फूलचन्द्र सिद्धान्तशास्त्री सविस्तार हिन्दी टीका)
Sarvarthasiddhi of Acharya Pujyapada on Tattvartha Sutra with Commentary
आचार्य उमास्वामी / पूज्यपाद (टीकाकार: पं. फूलचन्द्र सिद्धान्तशास्त्री) द्वारा
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चाहिए । परस्थानविहारकी अपेक्षा तो सासादन
सम्यग्दृष्टि देवोंका प्रथम तीन पृथिवियोंमें विहार
करनेसे दो राजु और ऊपर अच्युत स्वर्ग तक विहार
करनेसे छह राजू इस तरह आठ बटे चौदह राजु
स्पर्शन होता है अर्थात् त्रसनाडीके चौदह राजुओंमेंसे
आठ राजु प्रमाण । सर्वत्र आठ बटे चौदह इसी प्रकार
जानना । तथा बारह बटे चौदह इस प्रकार जानना—
सातवीं पृथ्वीमें सासादन आदि गुणस्थानोंको छोड़कर
मिथ्यात्व गुणस्थानवाला जीव ही नियमसे मारणान्तिक
समुद्घात करता है ऐसा नियम है । और छठी पृथ्वीसे
मध्य लोक पर्यन्त पाँच राजू सासादन सम्यग्दृष्टि
मारणान्तिक करता है। और मध्यलोकसे लोकके
अग्रभागमें बादर पृथिवीकाय, जलकाय और वनस्पति-
कायमें मारणान्तिक करनेसे सात राजू, इस तरह
बारह राजू स्पर्श होता है। सासादनसम्यग्दृष्टि वायु-
काय, तेजस्काय, नरक और सर्व सूक्ष्मकाय, इन चार
स्थानोंको