सर्वार्थसिद्धि: तत्त्वार्थसूत्र (आचार्य पूज्यपाद - पं. फूलचन्द्र सिद्धान्तशास्त्री सविस्तार हिन्दी टीका)
Sarvarthasiddhi of Acharya Pujyapada on Tattvartha Sutra with Commentary
आचार्य उमास्वामी / पूज्यपाद (टीकाकार: पं. फूलचन्द्र सिद्धान्तशास्त्री) द्वारा
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'अट्ठे व सयसहस्सा अट्ठानवदि तहा सहस्साणं ।
संखा जोगिजिणाणं पंचेव सया विउत्तरा होदि ॥'
—[ गो० जी० ६२८ ]
[ सयोगकेवलियों की संख्या भी उपशमकोंसे दूनी
होती है अतः आठ समयोंमें प्रथम आदि समयके
क्रमसे एक अथवा दो इत्यादिसे लेकर बत्तीस आदि
उत्कृष्ट संख्या पर्यन्त संख्या भेद जानना चाहिए ।
शंका—तब तो कहे गये क्षपकोंसे सयोगकेवलियोंका
भिन्न कथन करना व्यर्थ है (क्योंकि क्षपक भी
उपशमकोंसे दूने हैं ?)
उत्तर—नहीं, क्योंकि स्वकालमें समुदित ( एकत्री-
भूत ) संख्याकी अपेक्षा सयोगकेवलियोंमें क्षपकोंसे
भेद सम्भव है । स्वकालमें समुदित सयोगकेवलियों-
का परिमाण लाखपृथक्त्व है अर्थात् आठ लाख अठा-
नवे हजार पाँच सौ दो है । कहा भी है—'सयोग-
केवली जिनोंकी संख्या आठ लाख उठानवे हजार
पाँच सौ दो है ।' ]