सर्वार्थसिद्धि: तत्त्वार्थसूत्र (आचार्य पूज्यपाद - पं. फूलचन्द्र सिद्धान्तशास्त्री सविस्तार हिन्दी टीका)
Sarvarthasiddhi of Acharya Pujyapada on Tattvartha Sutra with Commentary
आचार्य उमास्वामी / पूज्यपाद (टीकाकार: पं. फूलचन्द्र सिद्धान्तशास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंस्थानान्यनन्तकायव्यपदेशार्हाणि परिहर्तव्यानि बहुघाताल्पफलत्वात् ।Wait,बहुजन्तुयोनिस्थानान्यनन्तकायव्यपदेशार्हाणि- checkयोनिस्थानान्य: बहुजन्तुयोनिस्थानान्यनन्तकायव्यपदेशार्हाणि` - yes!
L11:
यानवाहनाभरणादिष्वेतावदेवेष्टमतोऽन्यदनिष्टमित्यनिष्टान्निवर्तनं कर्तव्यं कालनियमेन यावज्जीवं
Correct.
L12:
अर्थात् एक रूप हो जाना ही जिसका प्रयोजन है वह सामायिक है। इतने देशमें और इतने काल
Correct.
L13:
तक इस प्रकार निश्चित की गयी सामायिकमें स्थित पुरुषके पहलेके समान महाव्रत जानना
Correct.
L14:
चाहिए, क्योंकि इसके सूक्ष्म और स्थूल दोनों प्रकारके हिंसा आदि पापोंका त्याग हो जाता है।
Correct.
L15:
शंका—यदि ऐसा है तो सामायिकमें स्थित हुए पुरुषके सकलसंयमका प्रसंग प्राप्त होता है ? समा-
Correct.
L16:
धान—नहीं, क्योंकि इसके संयमका घात करनेवाले कर्मोंका उदय पाया जाता है। शंका—तो फिर
Correct.
L17:
`इसके महाव्रतका अभाव प्राप्त होता है ? समाधान—