सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
सर्वार्थसिद्धि: तत्त्वार्थसूत्र (आचार्य पूज्यपाद - पं. फूलचन्द्र सिद्धान्तशास्त्री सविस्तार हिन्दी टीका)

सर्वार्थसिद्धि: तत्त्वार्थसूत्र (आचार्य पूज्यपाद - पं. फूलचन्द्र सिद्धान्तशास्त्री सविस्तार हिन्दी टीका)

Sarvarthasiddhi of Acharya Pujyapada on Tattvartha Sutra with Commentary

आचार्य उमास्वामी / पूज्यपाद (टीकाकार: पं. फूलचन्द्र सिद्धान्तशास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished558 पृष्ठ

पृष्ठ 384, कुल 558 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 384

स्थानान्यनन्तकायव्यपदेशार्हाणि परिहर्तव्यानि बहुघाताल्पफलत्वात् ।Wait,बहुजन्तुयोनिस्थानान्यनन्तकायव्यपदेशार्हाणि- checkयोनिस्थानान्य: बहुजन्तुयोनिस्थानान्यनन्तकायव्यपदेशार्हाणि` - yes!

L11:
यानवाहनाभरणादिष्वेतावदेवेष्टमतोऽन्यदनिष्टमित्यनिष्टान्निवर्तनं कर्तव्यं कालनियमेन यावज्जीवं
Correct.

L12:
अर्थात् एक रूप हो जाना ही जिसका प्रयोजन है वह सामायिक है। इतने देशमें और इतने काल
Correct.

L13:
तक इस प्रकार निश्चित की गयी सामायिकमें स्थित पुरुषके पहलेके समान महाव्रत जानना
Correct.

L14:
चाहिए, क्योंकि इसके सूक्ष्म और स्थूल दोनों प्रकारके हिंसा आदि पापोंका त्याग हो जाता है।
Correct.

L15:
शंका—यदि ऐसा है तो सामायिकमें स्थित हुए पुरुषके सकलसंयमका प्रसंग प्राप्त होता है ? समा-
Correct.

L16:
धान—नहीं, क्योंकि इसके संयमका घात करनेवाले कर्मोंका उदय पाया जाता है। शंका—तो फिर
Correct.

L17:
`इसके महाव्रतका अभाव प्राप्त होता है ? समाधान—