सर्वार्थसिद्धि: तत्त्वार्थसूत्र (आचार्य पूज्यपाद - पं. फूलचन्द्र सिद्धान्तशास्त्री सविस्तार हिन्दी टीका)

सर्वार्थसिद्धि: तत्त्वार्थसूत्र (आचार्य पूज्यपाद - पं. फूलचन्द्र सिद्धान्तशास्त्री सविस्तार हिन्दी टीका)
Sarvarthasiddhi of Acharya Pujyapada on Tattvartha Sutra with Commentary
आचार्य उमास्वामी / पूज्यपाद (टीकाकार: पं. फूलचन्द्र सिद्धान्तशास्त्री) द्वारा
DevanagariHindipublished558 पृष्ठ
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- ५।४२ § ६०८ ] पञ्चमोऽध्यायः २३७
§ ६०७. असकृत् 'परिणाम' शब्द उक्तः । तस्य कोऽर्थ इति प्रश्ने उत्तरमाह—
तद्भावः परिणामः ॥४२॥
§ ६०८. अथवा गुणा द्रव्यादर्थान्तरभूता इति केषांचिद्दर्शनं तत्किं भवतोऽभिमतम् । न;
इत्याह—यद्यपि कथंचिद् व्यपदेशादिभेदहेत्वपेक्षया द्रव्यादन्ये, तथापि तदव्यतिरेकात्तत्परिणामाच्च
नान्ये । यद्येवं स उच्यतां कः परिणाम इति । तन्निश्चयार्थमिदमुच्यते—धर्मादीनि द्रव्याणि येना- ५
त्मना भवन्ति स तद्भावस्तत्त्वं परिणाम इति आख्यायते । स द्विविधोऽनादिरादिमांश्च । तत्रा-
नादिर्धर्मादीनां गत्युपग्रहादिः सामान्यापेक्षया । स एवादिमांश्च भवति विशेषापेक्षया इति ।
इति तत्त्वार्थवृत्तौ सर्वार्थसिद्धिसंज्ञिकायां पञ्चमोऽध्यायः ।
§ ६०७. परिणाम शब्दका अनेक बार उल्लेख किया; परन्तु उसका क्या तात्पर्य है ऐसा
प्रश्न होनेपर अगले सूत्र द्वारा इसीका उत्तर देते हैं— १०
उसका होना अर्थात् प्रति समय बदलते रहना परिणाम है ॥४२॥
§ ६०८. अथवा गुण द्रव्यसे अलग हैं यह किन्हींका मत है । वह क्या आपके (जैन) मतमें
स्वीकार है ? नहीं, इसलिए कहते हैं कि संज्ञा आदिके निमित्तसे प्राप्त होनेवाले भेदके कारण गुण
द्रव्यसे कथंचित् भिन्न हैं तो भी वे द्रव्यसे भिन्न नहीं पाये जाते हैं और द्रव्यके परिणाम हैं इसलिए
भिन्न नहीं भी हैं। यदि ऐसा है तो वह बात कहिए जिससे परिणामका स्वरूप ज्ञात हो । बस १५
इसी बातका निश्चय करनेके लिए कहते हैं—धर्मादिक द्रव्य जिस रूपसे होते हैं वह तद्भाव या
तत्त्व है और इसे ही परिणाम कहते हैं । वह दो प्रकारका है—अनादि और सादि । उनमें-से
धर्मादिक द्रव्यके जो गत्युपग्रहादिक होते हैं वे सामान्यकी अपेक्षा अनादि हैं और विशेषकी अपेक्षा
सादि हैं।
इस प्रकार सर्वार्थसिद्धि नामक तत्त्वार्थवृत्तिमें पाँचवाँ अध्याय समाप्त हुआ । २०
१. हेतुत्वापेक्ष-मु० ।