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सर्वकोश
सर्वार्थसिद्धि: तत्त्वार्थसूत्र (आचार्य पूज्यपाद - पं. फूलचन्द्र सिद्धान्तशास्त्री सविस्तार हिन्दी टीका)

सर्वार्थसिद्धि: तत्त्वार्थसूत्र (आचार्य पूज्यपाद - पं. फूलचन्द्र सिद्धान्तशास्त्री सविस्तार हिन्दी टीका)

Sarvarthasiddhi of Acharya Pujyapada on Tattvartha Sutra with Commentary

आचार्य उमास्वामी / पूज्यपाद (टीकाकार: पं. फूलचन्द्र सिद्धान्तशास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished558 पृष्ठ

पृष्ठ 341, कुल 558 में से

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पृष्ठ 341

वाले पर- १५(Marginal१५` at end)

  • Line 16:
    माणुके साथ अवश्य बन्ध होता है । उसी दो रूक्ष शक्त्यंशवाले परमाणुका आगेके पांच आदि
  • Line 17:
    रूक्ष शक्त्यंशवाले परमाणुओंके साथ बन्ध नहीं होता । इसी प्रकार तीन आदि रूक्ष .शक्त्यंशवाले (Wait, .शक्त्यंशवाले or रूक्ष शक्त्यंशवाले? Line 17 has रूक्ष शक्त्यंशवाले.)
  • Line 18:
    परमाणुओंका भी दो अधिक शक्त्यंशवाले परमाणुओंके साथ बन्ध जान लेना चाहिए । समान
  • Line 19:
    जातीय परमाणुओंमें बन्धका जो क्रम बतलाया है विजातीय परमाणुओंमें भी बन्धका वही क्रम
  • Line 20:
    जानना चाहिए । कहा भी है—'स्निग्धका दो अधिक शक्त्यंशवाले स्निग्धके साथ बन्ध होता है । २० (Marginal २० at end)
  • Line 21:
    रूक्षका दो अधिक शक्त्यंशवाले रूक्षके साथ बन्ध होता है । तथा स्निग्धका रूक्षके साथ सम या
  • Line 22:
    `विषम गुणोंके होनेपर इसी नियमसे बन्ध होता है । किन्तु जघन्य शक्त्यंश