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सर्वकोश
सर्वार्थसिद्धि: तत्त्वार्थसूत्र (आचार्य पूज्यपाद - पं. फूलचन्द्र सिद्धान्तशास्त्री सविस्तार हिन्दी टीका)

सर्वार्थसिद्धि: तत्त्वार्थसूत्र (आचार्य पूज्यपाद - पं. फूलचन्द्र सिद्धान्तशास्त्री सविस्तार हिन्दी टीका)

Sarvarthasiddhi of Acharya Pujyapada on Tattvartha Sutra with Commentary

आचार्य उमास्वामी / पूज्यपाद (टीकाकार: पं. फूलचन्द्र सिद्धान्तशास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished558 पृष्ठ

पृष्ठ 176, कुल 558 में से

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पृष्ठ 176

६४ सर्वार्थसिद्धौ [ १।८ § १५५ -
§ १५५. संयमानुवादेन सामायिकच्छेदोपस्थापनाशुद्धिसंयतेषु द्वयोरुपशमकयोस्तुल्या संख्या।
ततः संख्येयगुणौ क्षपकौ। अप्रमत्ताः संख्येयगुणाः। प्रमत्ताः संख्येयगुणाः। परिहारशुद्धिसंयतेषु
अप्रमत्तेभ्यः प्रमत्ताः संख्येयगुणाः। सूक्ष्मसांपरायशुद्धिसंयतेषु उपशमकेभ्यः क्षपकाः संख्येयगुणाः।
यथाख्यातविहारशुद्धिसंयतेषु उपशान्तकषायेभ्यः क्षीणकषायाः संख्येयगुणाः। अयोगकेवलिनस्ता-
वन्त एव। सयोगकेवलिनः संख्येयगुणाः। संयतासंयतानां नास्त्यल्पबहुत्वम्। असंयतेषु सर्वतः
स्तोकाः सासादनसम्यग्दृष्टयः। सम्यङ्मिथ्यादृष्टयः¹ संख्येयगुणाः। असंयतसम्यग्दृष्टयोऽसंख्येयगुणाः।
मिथ्यादृष्टयोऽनन्तगुणाः।
§ १५६. दर्शनानुवादेन चक्षुर्दर्शनानां मनोयोगिवत्। अचक्षुर्दर्शनानां काययोगिवत्। अवधि-
दर्शनानामवधिज्ञानिवत्। केवलदर्शनानां केवलज्ञानिवत्।
§ १५७. लेश्यानुवादेन कृष्णनीलकापोतलेश्यानां असंयतवत्। तेजःपद्मलेश्यानां सर्वतः
स्तोका अप्रमत्ताः। प्रमत्ताः संख्येयगुणाः। एवमितरेषां पञ्चेन्द्रियवत्। शुक्ललेश्यानां सर्वतः स्तोका
उपशमकाः। क्षपकाः संख्येयगुणाः। सयोगकेवलिनः संख्येयगुणाः। अप्रमत्तसंयताः संख्येयगुणाः।
प्रमत्तसंयताः संख्येयगुणाः। संयतासंयता² असंख्येयगुणाः। सासादनसम्यग्दृष्टयोऽसंख्येयगुणाः।
सम्यग्मिथ्यादृष्टयः संख्येयगुणाः। मिथ्यादृष्टयोऽसंख्येयगुणाः। असंयतसम्यग्दृष्टयः ४संख्येयगुणाः।
§ १५८. भव्यानुवादेन भव्यानां सामान्यवत्। अभव्यानां नास्त्यल्पबहुत्वम्।
§ १५५. संयम मार्गणा के अनुवादसे सामायिक और छेदोपस्थापना शुद्धिसंयतोंमें दोनों
उपशमक समान संख्यावाले हैं। इनसे दोनों क्षपक संख्यातगुणे हैं। इनसे अप्रमत्तसंयत संख्यातगुणे
हैं। इनसे प्रमत्तसंयत संख्यातगुणे हैं। परिहारविशुद्धि संयतोंमें अप्रमत्तसंयतोंसे प्रमत्तसंयत
संख्यातगुणे हैं। सूक्ष्मसाम्परायिक शुद्धिसंयतोंमें उपशमकोंसे क्षपक संख्यातगुणे हैं। यथाख्यात
विहार शुद्धिसंयतोंसे उपशान्तकषायवालोंसे क्षीणकषाय जीव संख्यातगुणे हैं। अयोगकेवली उतने
ही हैं। सयोगकेवली संख्यातगुणे हैं। संयतासंयतोंका अल्पबहुत्व नहीं है। असंयतोंमें सासादन-
सम्यग्दृष्टि सबसे थोड़े हैं। इनसे सम्यग्मिथ्यादृष्टि संख्यातगुणे हैं। इनसे असंयतसम्यग्दृष्टि असंख्यात-
गुणे हैं। इनसे मिथ्यादृष्टि अनन्तगुणे हैं।
§ १५६. दर्शनमार्गणाके अनुवादसे चक्षुदर्शनवालोंका अल्पबहुत्व मनोयोगियोंके समान है।
अचक्षुदर्शनवालोंका अल्पबहुत्व काययोगियोंके समान है। अवधिदर्शनवालोंका अल्पबहुत्व अवधि-
ज्ञानियोंके समान है और केवलदर्शनवालोंका अल्पबहुत्व केवलज्ञानियोंके समान है।
§ १५७. लेश्या मार्गणाके अनुवादसे कृष्ण, नील और कापोत लेश्यावालोंका अल्पबहुत्व
असंयतोंके समान है। पीत और पद्म लेश्यावालोंमें अप्रमत्तसंयत सबसे थोड़े हैं। इनसे प्रमत्तसंयत
संख्यातगुणे हैं। इसी प्रकार शेष गुणस्थानवालोंका अल्पबहुत्व पंचेन्द्रियोंके समान है। शुक्ल
लेश्यावालोंमें उपशमक सबसे थोड़े हैं। इनसे क्षपक संख्यातगुणे हैं। इनसे सयोगकेवली संख्यात-
गुणे हैं। इनसे अप्रमत्तसंयत संख्यातगुणे हैं। {इनसे प्रमत्तसंयत संख्यातगुणे हैं। इनसे संयतासंयत
असंख्यातगुणे हैं। इनसे सासादनसम्यग्दृष्टि असंख्यातगुणे हैं। इनसे सम्यग्मिथ्यादृष्टि संख्यातगुणे
हैं। इनसे मिथ्यादृष्टि असंख्यातगुणे हैं। इनसे असंयतसम्यग्दृष्टि संख्यातगुणे हैं।
§ १५८. भव्य मार्गणाके अनुवादसे भव्योंका अल्पबहुत्व ओघके समान है। अभव्योंका
अल्पबहुत्व नहीं है।
१. -दृष्टयोऽसंख्ये-मु० । २. संयताः संख्ये-मु० । ३. दृष्टयः संख्ये-मु० । ४. -दृष्टयोऽसंख्ये-मु० ।