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सर्वकोश
सर्वार्थसिद्धि: तत्त्वार्थसूत्र (आचार्य पूज्यपाद - पं. फूलचन्द्र सिद्धान्तशास्त्री सविस्तार हिन्दी टीका)

सर्वार्थसिद्धि: तत्त्वार्थसूत्र (आचार्य पूज्यपाद - पं. फूलचन्द्र सिद्धान्तशास्त्री सविस्तार हिन्दी टीका)

Sarvarthasiddhi of Acharya Pujyapada on Tattvartha Sutra with Commentary

आचार्य उमास्वामी / पूज्यपाद (टीकाकार: पं. फूलचन्द्र सिद्धान्तशास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished558 पृष्ठ

पृष्ठ 175, कुल 558 में से

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पृष्ठ 175

– ११८ § १५४ ] प्रथमोऽध्यायः ६३
§ १५१. कायानुवादेन स्थावरकायेषु गुणस्थानभेदाभावादल्पबहुत्वाभावः। त्रसकायिकानां
पञ्चेन्द्रियवत् ।
§ १५२. योगानुवादेन वाङ्मनसयोगिनां पञ्चेन्द्रियवत् । काययोगिनां सामान्यवत् ।
वेदानुवादेन स्त्रीपुंवेदानां पञ्चेन्द्रियवत् । नपुंसकवेदानामवेदानां च सामान्यवत् ।
§ १५३. कषायानुवादेन क्रोधमानमायाकषायाणां पुंवेदवत् । अयं तु विशेषः मिथ्यादृष्टयोऽ- ५
नन्तगुणाः । लोभकषायाणां द्वयोरुपशमकयोस्तुल्या संख्या । क्षपकाः संख्येयगुणाः । सूक्ष्मसांपराय-
शुद्ध्युपशमकसंयता विशेषाधिकाः । सूक्ष्मसांपरायक्षपकाः संख्येयगुणाः । शेषाणां सामान्यवत् ।
§ १५४. ज्ञानानुवादेन मत्यज्ञानिश्रुताज्ञानिषु सर्वतः स्तोकाः सासादनसम्यग्दृष्टयः ।
मिथ्यादृष्टयोऽनन्तगुणाः२। विभङ्गज्ञानिषु सर्वतः स्तोकाः सासादनसम्यग्दृष्टयः । मिथ्यादृष्टयोऽ-
संख्येयगुणाः । मतिश्रुतावधिज्ञानिषु सर्वतः स्तोकाश्चत्वार उपशमकाश्चत्वारः क्षपकाः संख्येयगुणाः । १०
अप्रमत्तसंयताः संख्येयगुणाः । प्रमत्तसंयताः संख्येयगुणाः । संयतासंयताः ३असंख्येयगुणाः । असंयत-
सम्यग्दृष्टयः४ असंख्येयगुणाः । मनःपर्ययज्ञानिषु सर्वतः स्तोकाश्चत्वार उपशमकाः । चत्वारः
क्षपकाः संख्येयगुणाः । अप्रमत्तसंयताः संख्येयगुणाः । प्रमत्तसंयताः संख्येयगुणाः । केवलज्ञानिषु
अयोगकेवलिभ्यः सयोगकेवलिनः संख्येयगुणाः ।
अल्पबहुत्व नहीं है। पंचेन्द्रियोंका अल्पबहुत्व ओघके समान है। किन्तु इतनी विशेषता है कि १५
असंयत सम्यग्दृष्टि पंचेन्द्रियोंसे मिथ्यादृष्टि पंचेन्द्रिय असंख्यातगुणे हैं।
§ १५१. काय मार्गणाके अनुवादसे स्थावरकायिकोंमें गुणस्थान भेद न होनेसे अल्पबहुत्व
नहीं है। त्रसकायिकोंका अल्पबहुत्व पंचेन्द्रियोंके समान है।
§ १५२. योग मार्गणाके अनुवादसे वचनयोगी और मनोयोगी जीवोंका अल्पबहुत्व
पंचेन्द्रियोंके समान है। काययोगियोंका अल्पबहुत्व ओघके समान है। वेद मार्गणाके अनुवादसे २०
स्त्रीवेदी और पुरुषवेदी जीवोंका अल्पबहुत्व पंचेन्द्रियोंके समान है। नपुंसकवेदी और वेदरहित
जीवोंका अल्पबहुत्व ओघके समान है।
§ १५३. कषाय मार्गणाके अनुवादसे क्रोधकषायवाले, मानकषायवाले और मायाकषायवाले
जीवोंका अल्पबहुत्व पुरुषवेदियोंके समान है। किन्तु इतनी विशेषता है कि इनमें असंयत सम्यग्दृ-
ष्टियोंसे मिथ्यादृष्टि अनन्तगुणे हैं। लोभ कषायवालोंमें दोनों उपशमकोंकी संख्या समान है। इनसे २५
क्षपक संख्यातगुणे हैं। इनसे सूक्ष्मसाम्पराय उपशमक विशेष अधिक हैं। इनसे सूक्ष्मसाम्पराय
क्षपक संख्यातगुणे हैं। आगे शेष गुणस्थानवालोंका अल्पबहुत्व ओघके समान है।
§ १५४. ज्ञान मार्गणाके अनुवादसे मत्यज्ञानी और श्रुताज्ञानियोंमें सासादनसम्यग्दृष्टि सब-
से थोड़े हैं। मिथ्यादृष्टि अनन्तगुणे हैं। विभंगज्ञानियोंमें सासादनसम्यग्दृष्टि सबसे थोड़े हैं। मिथ्या-
दृष्टि असंख्यातगुणे हैं। मतिज्ञानी, श्रुतज्ञानी और अवधिज्ञानियोंमें चारों उपशमक सबसे थोड़े हैं। ३०
इनसे चारों क्षपक संख्यातगुणे हैं। इनसे अप्रमत्तसंयत संख्यातगुणे हैं। इनसे प्रमत्तसंयत संख्यात-
गुणे हैं। इनसे संयतासंयत असंख्यातगुणे हैं। इनसे असंयतसम्यग्दृष्टि असंख्यातगुणे हैं। मनःपर्यय-
ज्ञानियोंमें चारों उपशमक सबसे थोड़े हैं। इनसे चारों क्षपक संख्यातगुणे हैं। इनसे अप्रमत्तसंयत
संख्यातगुणे हैं। इनसे प्रमत्तसंयत संख्यातगुणे हैं। केवलज्ञानियोंमें अयोगकेवलियोंसे सयोगकेवली
संख्यातगुणे हैं। ३५
१. -भावः । कायं प्रत्युच्यते । सर्वतस्तेजःकायिका अल्पाः । ततो बहवः पृथिवीकायिकाः । ततोऽप्यप्कायिकाः ।
ततो वातकायिकाः । सर्वतोऽनन्तगुणा वनस्पतयः । त्रस–मु० । २. दृष्टयोऽसंख्येयगुणाः । मति–मु० ।
३. —यताः संख्ये-मु० । ४. –ष्टयः संख्ये-मु० ।
CC-0 Pt. Chakradhar Joshi and Sons, Dev Prayag. Digitized by eGangotri