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सर्वकोश
संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad

महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा

DevanagariHindipublished267 पृष्ठ

पृष्ठ 86, कुल 267 में से

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पृष्ठ 86

शब्द संग्रह ७७
मात पिता तुम को दियो तुम हीं भल जानो हो१ ।
तुम तजि और भतार को मन मैं नहिँ आनेौँ हो ॥ ६॥
तुम हो पूरे साइयाँ पूरन पद दीजै हो ।
मीरा ब्याकुल बिरहनी अपनी करि लीजै हो ॥ ७ ॥
(२)
तुम पलक उघाड़े दीनानाथ, हूँ हाजिर नाजिर कब की खड़ी ॥टेक
साऊ२ थे दुसमन होइ लागे, सब ने लगूँ कड़ी३ ।
तुम बिन साऊ कोऊ नहीं है, डिगी४ नाव मेरी समँद अड़ी १
दिन नहिँ चैन रात नहिँ निदरा, सूखूँ खड़ी खड़ी ।
बान बिरह के लगे हिये मैं, भूलूँ न एक घड़ी ॥२।
पत्थर की तो अहिल्या तारी, बन के बीच पड़ी ।
कहा बोझ मीरा मैं कहिये, सौ ऊपर एक धड़ी५ ॥३॥
गुरु रैदास मिले मोहिँ पूरे, धुर से कलम भिड़ी ।
सतगुरु सैन दई जब आ के, जोत मैं जोत रली ॥४॥
॥ उपदेश ॥
राम नाम रस पीजे मनुवाँ, राम नाम रस पीजे ॥टेक॥
तज कुसंग सतसंग बैठ नित, हरि चरचा सुण लीजे ॥१॥
काम क्रोध मद लोभ मोह कूँ, चित से बहाय दीजे ॥२॥
मीरा के प्रभु गिरधर नागर, ताहि के रँग मैं भींजै ॥३॥
(१) देखो जीवन-चरित्र मीरा बाई का उनकी शब्दावली के ग्रंथ में।
(२) रक्षक। (३) कड़वी। (४) झकोला खाती है। (५) पसेरी।