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सर्वकोश
संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad

महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा

DevanagariHindipublished267 पृष्ठ

पृष्ठ 85, कुल 267 में से

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पृष्ठ 85

७६ मीरा बाई
(५)
निपट बंकट¹ छबि, अटके मेरे नैना ॥ टेक ॥
देखत रूप मदन मोहन को, पियत पीयूष² न मटके³ ॥१॥
बारिजें⁴ भँवाँ अलक⁵ टेढ़ी मनो, अति सुगंधि रस अटके ॥
टेढ़ी कटि⁶ टेढ़ी कर मुरली, टेढ़ी पाग लर⁷ लटके ॥३॥
मीरा प्रभु के रूप लुभानी, गिरधर नागर नट के ॥४॥
(६)
बरखे बदरिया सावन की, सावन की मन भावन की ॥टेक॥
सावन मैं उमग्यो मेरो मनवा, भनक सुनी हरि आवन की ॥१॥
उमड़ घुमड़ चहुँ दिस से आयो,दामिन दमके झरलावन की ॥२॥
नन्ही नन्ही बूँदन मेहा बरसे, सीतल पवन सुहावन की ॥३॥
मीरा के प्रभु गिरधर नागर, आनँद मंगल गावन की ॥४॥
॥ बिनय ॥
(१)
पियां मोहिं आरत तेरी हो ।
आरत तेरे नाम की मोहिं साँझ सबेरी हो ॥ १ ॥
या तन को दियना करैँ मनसा करैँ बाती हो ।
तेल भरावैँ प्रेम का बारौँ दिन राती हो ॥ २ ॥
पटियाँ पारौँ गुर ज्ञान की सुमति माँग सवारौँ हो ।
पिया तेरे कारने धन जोबन वारौँ हो ॥ ३ ॥
सेजड़िया बहु-रंगिया चंगा फूल बिछाया हो ।
रैन गई तारा गिणत प्रभु अजहुँ न आया हो ॥ ४ ॥
सावन भादौँ ऊमड़ो बरखा रितु छाई हो ।
भौंह घटा घन घेरि के नैनन भरि लाई हो ॥ ५ ॥
(१) बाँकी । (२) अमृत । (३) मुड़े । (४) कँवल । (५) बाल की लट । (६)
कमर । (७) पेंच ।