संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)
Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad
महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंशब्द संग्रह ७५
कुंडल की अलक झलक कपोलन पर छाई ।
मनो१ मीन सरवर तजि सकर२ मिलन आई ॥ ३ ॥
कुटिल भृकुटि३ तिलक भाल चितवन मैँ टोना ।
खंजन४ अरु मधुप५ मीन भूले मृग छौना६ ॥ ४ ॥
सुंदर अति नासिका सुग्रीव७ तीन रेखा ।
नटवर८ प्रभु भेष धरे रूप अति विसेषा ॥ ५ ॥
अधर बिंब अरुन नैन मधुर मंद हाँसी ।
दसन६ दमक दाड़िम१० दुति११ चमके चपला१२ सी ॥ ६ ॥
छुद्र घंट किंकिनी१३ अनूप धुनि सुहाई ।
गिरधर के अंग अंग मीरा बलि जाई ॥ ७ ॥
(४)
या मोहन के मैं रूप लुभानी ॥ टेक ॥
हाट बाट मोहिँ रोकत टोकत,
या रसिया की मैं सार न जानी ॥ १ ॥
सुंदर बदन कमल-दल लोचन,
बाँकी चितवन मंद मुसकानी ॥ २ ॥
जमुना के नीरे तीरे धेनु चरावत,
बंसी मैं गावत मीठी बानी ॥ ३ ॥
तन मन धन गिरधर पर वारूँ,
चरन कमल मीरा लपटानी ॥ ४ ॥
(१) मानो, गोया कि । (२) मगर । (३) भौँ । (४) खेड़रिच चिड़िया । (५)
भौंरा । (६) बच्चा । (७) सुंदर गला । (८) नट के समान काछनी काछे ।
(६) दाँत । (१०) अनार । (११) प्रकाश । (१२) बिजली । (१३) छोटी छोटी घंटियाँ
जो करधनी में पोह देते हैं ।