संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)
Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad
महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा
पृष्ठ 82, कुल 267 में से
संदर्भ में पढ़ेंशब्द संग्रह ७३
(१०)
होली
रमैया बिन नींद न आवे ।
नींद न आवे बिरह सतावे, प्रेम की आँच दुलावे१ ॥टेक॥
बिन पिया जोत मंदिर अँधियारो, दीपक दाय२ न आवे।
पिया बिना मेरी सेज अलूनी३, जागत रैन बिहावे४,
पिया कब रे घर आवे ॥१॥
दादुर स़ोर पपीहा बोले, कोयल सबद सुनावे ।
घुमँड़ घटा ऊलर५ होइ आई, दामिनि दमक डरावे,
नैन झर लावे ॥२॥
कहा करूँ कित जाउँ मोरी सजनो, बेदन कून बुतावे६ ।
बिरह नागिन मोरी काया डसी है, लहर लहर जिव जावे,
जड़ी घस लावे ॥ ३ ॥
को है सखी सहेली सजनी, पिया कूँ आन मिलावे ।
मीरा कूँ प्रभु कब रे मिलोगे, मनमोहन मोहिँ भावे,
कबै हँस करि बतलावे७ ॥ ४ ॥
(११)
होली
होली पिया बिन मोहिँ न भावै, घर आँगन न सुहावै ॥टेक॥
दीपक जोय कहा करूँ हेली, पिय परदेस रहावे ।
सूनी सेज जहर ज्यूँ लागे, सुसक सुसक जिय जावे,
नींद नैन नहि आवे ॥ १ ॥
कब की ठाढ़ी मैं मग जोऊँ, निस दिन बिरह सतावे ।
कहा कहूँ कछु कहत न आवे, हिवड़ो अति अकुलावे,
पिया कब दरस दिखावे ॥ २ ॥
(१) सुलगाना । (२) पसंद । (३) फीकी । (४) बीते । (५) चढ़ना । (६)
बुझावे, शांत करे । (७) बोले ।
१०