संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)
Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad
महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें७२ मीरा बाई
माँस-गलि गलि छीजिया रे, करक रह्या गल आहि १ ।
आँगुलियाँ की मूँदड़ी, म्हाँरे आवन लागी बाँहि ॥४॥
रहु रहु पापी पपीहा रे, पिव को नाम न लेय ।
जे कोइ बिरहन साम्हले २, तो पित्र कारन जिव देय ॥५॥
खिन मन्दिर खिन आँगने रे, खिन खिन ठाढ़ी होय ।
घायल ज्यूँ घूमूँ खड़ी, म्हाँरी विथा न बूझे कोय ॥६॥
काढ़ि कलेजो मैं धरूँ रे, कौवा तू ले जाय ।
ज्याँ देखाँ म्हाँरो पिव बसै रे, वे देखत तू खाय ॥७॥
म्हाँरे नातो नाम को रे, और न नातो कोय ।
मीरा ब्याकुल बिरहनी रे, पिय दरसन दीज्यो मोय ॥८॥
(८)
दरस बिन दूखन लागे नैन ॥ टेक ॥
जब से तुम बिछरे मेरे प्रभुजी, कबहुँ न पायौँ चैन ॥१॥
सबद सुनत मेरी छतिया कंपै, मीठे लगे तुम वैन ॥२॥
एक टकटकी पंथ निहारूँ, भई छमासी रैन ॥३॥
बिरह बिथा कासूँ कहूँ सजनी, बह गइ करवत ऐन ॥४॥
मीरा के प्रभु कब रे मिलोगे, दुख मेटन सुख देन ॥५॥
(९)
मतवारो बादल आयो रे,
हरि को सँदेसो कुछ नहिँ लायो रे ॥ टेक ॥
दादुर मोर पपीहा बोले, कोयल सबद सुनायो रे ।
कारी अँधियारी बिजली चमके, बिरहन अति डरपायो रे ॥१
गाजे बाजे पवन मधुरिया, मेहा अति झड़ लायो रे ।
फूँके ३ काली नाग बिरह की जारी, मीरा-मन हरि भायो रे ॥२
(१) हाड़। (२) सुन पावै। (३) साँप फूपकार मारता है।