संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)
Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad
महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा
पृष्ठ 74, कुल 267 में से
संदर्भ में पढ़ेंशब्द संग्रह ६५
तीन लोक के तुम प्रति-पालक, मैं तो दास तिहारो ।
तारी जाति कुजाति प्रभू जी, मो पर किरपा धारो ॥२॥
पतितन मैं इक नायक कहिये, नीचन मैं सरदारी ।
कोटि पापी इक पासँग मेरे, अजामिल कौन बिचारी ॥३॥
नाठो धरम नाम सुनि मेरो, नरक कियो हठ तारो ।१
मो को ठौर नहीं अब कोऊ, अपनो बिरद सम्हारी ॥४॥
छुद्र पतित तुम तारे रमापति, अब न करो जियगारो ।
सूरदास साचो तब माने, जो ह्वै मम निस्तारो ॥ ५ ॥
(८)
चूक परी मो तैं मैं जानी, मिलैं स्याम बकसाऊँ री ।
हा हा करि दसननि तृन धरिधरि, लोचन जलनि ढराऊँ री२ १
चरन गहौँ गाढ़े करि कर सौँ, पुनि पुनि सीस छुआऊँ री ।
मुख चितऊँ फिरि धरनि निहारौँ, ऐसे रुचि उपजाऊँ री ॥२
मिलैँ धाय अकुलाय भुजनि भरि, उर की तपनि जनाऊँ री ।
सूरस्याम अपराध छमहु अब, यह कहि कहि जु सुनाऊँ री ३
(९)
माधो जू जो जन तैं बिगरै ।
सुन कृपालु करुनामय कबहुँ, प्रभु नहिँ चित्त धरै ॥ १ ॥
ज्यौँ सिसु३ जननि४ जठर५ अंतरगत, सत अपराध करै ।
तऊ तनय६ तनु तोष पोष चित, बिहँसत अंक भरै ॥२॥
जदपि बिटप७ जर हतन८ हेत करि, कर कुठार पकरै ।
तदपि सुभाव सुसील सुसीतल, रिपु तनु ताप हरै ॥३॥
(१) धर्मराय ने मेरा नाम सुनकर मुझे ग्रहण करने से इनकार किया और
नर्क बोला कि हमारे यहाँ रहने के यह योग्य नहीं है-इस को तार कर हटाओ ।
(२) दाँतों के नीचे तिनका धर कर (जोकि निशान आधीनता का है) आँखों से
जल धारा वहाती हूँ । (३) बालक । (४) माता । (५) पेट । (६) बेटा । (७) पेड़ ।
(८) काटने के लिये ।
६