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सर्वकोश
संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad

महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा

DevanagariHindipublished267 पृष्ठ

पृष्ठ 68, कुल 267 में से

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पृष्ठ 68

शब्द संग्रह ५६
हौं जो चढ़ी थी अपनी अटा पर, वह झट निकस्यो आने
मंद हँसन मुख देखि कृस्न को, क्या हौं कहौँ बखाने,
सखी कोइ पीर न जाने ॥२॥
हौं घायल मिरगी ज्यौं घूमत, परी धरनि पर आने ।
मंत्र जंत्र औषधि घिस लाये, बिसरे सभी¹ उपाव,
सखी कोइ लोग सियाने ॥३॥
और उपाव नहीं कोउ दूजो, स्याम मिलावो आने ।
जानत हैं पिय पीर हमारी, सूरदास के प्रान,
सखी कोइ और न जाने ॥ ४ ॥
(७)
होली
साँवरे सौं कहियो मोरी ॥ टेक ॥
सीस नवाय चरन गहि लीजो, करि बिनती कर जोरी
ऐसी चूक कहा परी मो सौं, प्रीति पाछली तोरी,
सुरति ना लीन्हि बहोरी ॥ १ ॥
भूषन बसन सभी तजि दीन्हे, खान पान बिसरो री ।
बिभुति रमाय जोगिन ह्वै बैठौं, तेरो ही ध्यान धरो री,
अब मैं कैसी करौँ री ॥ २ ॥
निसि दिन ब्याकुल फिरत राधिका, बिरह बिधा तन घेरी ।
बारि² करेजा जारि दियो है, अब मैं कैसी करौँ री ।
बेग चलि आवो किसोरी ॥ ३ ॥
रोम रोम बिष छाय रह्यो है, मधु मेरे बैर परो री ।
स्याम तुम्हें ढूँढ़त कुंजन में, सीस लटा गहि झोरी,
कहौँ हरि हो हरि हो री ॥ ४ ॥
(१) सब लोग । (२) बाल अवस्था का अर्थात कोमल ।