संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)
Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad
महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा
DevanagariHindipublished267 पृष्ठ
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५६ सूरदासजी
॥ चितावनी ॥
(१)
रे मन जन्म पदारथ जात ।
बिछुरे मिलन बहुरि कब ह्वै है, ज्यौँ तरवर के पात ॥१॥
सन्नपात कफ कंठ बिरोधी, रसना टूटी बात ।
प्रान लिये जम जात मूढ़ मति, देखत जननी तात ॥२॥
छिन इक माहिँ कोटि जुग बीतत, पीछे नर्क की बात ।
यह जग प्रीति सुआ सेमर की, चाखत ही उड़ि जात ॥३॥
जम के फंद नहीं पडु बौरै, चरनन चित्त लगाय ।
कहत सूर बिरथा यह दैही, अंनर कयौँ ऽ रात ॥४॥
(२)
जा दिन मन पंछी उड़ि जैहैँ ।
ता दिन तेरे तन तरुवर के, सबै पात झरि जैहैँ ॥ १ ॥
घर के कहैँ बेग ही काढो, भूत भये कोउ खैहैँ ।
जा प्रीतम से प्रीति घनेरी, सोऊ देखि डरैहैँ ॥ २ ॥