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सर्वकोश
संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad

महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा

DevanagariHindipublished267 पृष्ठ

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५४ गुरु नानक
कौन बस्तु आई तेरे संग, लपट रह्यो रस लोभि ५. ॥४
राम नाम जप हिरदे माहीं, नानक पत सेती घर जाही ॥५
(७)
रे मन कौन गति होइ है तेरी ॥ टेक ॥
एहि जग मैं राम नाम, सो तो नहिँ सुन्यो कान ।
विषयन सौँ अति लुभान, मति नाहिन फेरी ॥ १ ॥
मानस को जलम लीन्ह, सिमरन नहिँ निमिष कीन्ह ।
दारा सुत भयो दीन, पगहुँ परी बेरी ॥ २ ॥
नानक जन कह पुकार, सुपने ज्यौँ जग पसार ।
सिमरत नहिँ क्यौँ मुरार, माया जा की चेरी ॥ ३ ॥
(८)
साधो रचना राम बनाई ।
इक बिनसै इक इसिथर मानै, अचरज लख्यौ न जाई ॥१॥
काम क्रोध मोह बस, प्रानी, हरि मूरति बिसराई ।
झूठा तन साचा करि मान्यो, ज्यौँ सुपना रैनाई ॥२॥
जो दीसै सो सकल बिनासै, ज्यौँ बादर की छाँई ।
जन नानक जग जानौ मिथ्या, रहौ राम सरनाई ॥३॥