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सर्वकोश
संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad

महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा

DevanagariHindipublished267 पृष्ठ

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५० गुरु नानक
सकल जनम भ्रम ही भ्रम खोयो, नहिँ इस्थिर मति . ई ।
बिषयासक्त रह्यो निसि बासर, नहिँ छूटी अधमाई ॥२॥
साधु संग कबहुँ नहिँ कीन्हा, नहिँ कीरति प्रभ¹ गाई ।
जन नानक मैं नाहीँ कोउ गुन, राखि लेहु सरनाई ॥३॥
(३)
प्रभ जी यही मनोरथ मेरा ।
कृपा-निधान दयाल मोहिँ दीजै, करि संतन का चेरा ॥१॥
प्रात काल लागौँ जन चरनी, निसि बासर दरसन पावौँ ।
तन मन अरप करौँ जन सेवा, रसना हरि गुन ⸴ ⸴" ॥२॥
साँस साँस सुमिरौँ प्रभु अपना, संत संग नित रहिये ।
एक अधार नाम धन मेरा, आनंद नानक यह लहिये ॥३॥
(४)
अब हम चली ठाकुर पहिँ हार ।
जब हम सरन प्रभू की आईँ, राख प्रभु भावै मार ॥१॥
लोगन की चतुराई उपमा, ते