संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)
Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad
महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंशब्द संग्रह ४६
तसब्री एक अजूब है, जा मैं हर दम दाना ।
कुंज किनारे बैठि के, फेरा तिन्ह जाना ॥ २ ॥
क्या बकरी क्या गाय है, क्या अपने जाया ।
सब को लोहू एक है, साहिब फरमाया ॥ ३ ॥
पीर पैगंबर औलिया, सब मरने आया ।
नाहक जीव न मारिये, पोषन को काया ॥ ४ ॥
हिरिस हिये हैवान है, बसि करिले आई ।
दाद¹ इलाही नानका, जिसे देवे खुदाई ॥ ५ ॥
(२)
काहे रे बन खोजन जाई ।
सर्व निवासी सदा अलेपा, तोही संग समाई ॥ १ ॥
पुष्प मध्य ज्यौं बास बसत है, मुकर माहिं जस छाँईँ ।
तैसेही हरि बसै निरंतर, घट ही खोजो भाई ॥ २ ॥
बाहर भीतर एकै जानो, यह गुरु ज्ञान बताई ।
जन नानक बिन आपा चीन्हे, मिटै न भ्रम की काई ॥३।
॥ विनय ॥
(१)
प्रब² मेरे प्रीतम प्रान पियारे ।
प्रेम भक्ति निज नाम दीजिये, द्याल अनुग्रह धारे ॥१॥
सुमिरौं चरन तिहारे प्रीतम, रिदे तिहारी आसा ।
संत जनाँ पै करौं बेनती, मन दरसन को प्यासा ॥ २ ॥
बिछुरत मरन जीवन हरि मिलते, जन को दरसन दीजै ।
नाम अधार जीवन धन नानक, प्रब मेरे किरपा कीजै ॥३॥
(२)
माई मैं केहि बिधि लखौं गुसाईं ।
महा मोह अज्ञान तिमिर मैं, मन रहियो उरझाई ॥१॥
(१) दात, बख़्शिश । (२) प्रभु ।
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