संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)
Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad
महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा
पृष्ठ 55, कुल 267 में से
संदर्भ में पढ़ेंगुरु नानक
[ संक्षिप्त जीवन-चरित्र के लिये देखो पृष्ठ ६७ संतवानी संग्रह, भाग १ ]
(१)
राम सुमिर राम सुमिर एही तेरो काज है ॥टेक॥
माया को संग त्याग, हरि जू की सरन लाग ।
जगत सुख मान मिथ्या, झूठौ सब साज है ॥ १ ॥
सुपने ज्योँ धन पिछान, काहे पर करत मान ।
बारू की भीत तैसे, बसुधा को राज है ॥ २ ॥
नानक जन कहत बात, बिनसि जैहै तेरो गात ।
छिन छिन करि गयो काल्ह, तैसे जात आज है ॥ ३ ॥
(२)
इस दम दा मैनूँ की बे भरोसा,
आया आया न आया न आया ॥ १ ॥
सोच बिचार करै मत मन मैं,
जिस ने ढूँढा उसने पाया ॥ २ ॥
या संसार रैन दा सपना,
कहिँ दीखा कहिँ नाहिँ दिखाया ॥ ३ ॥
नानक भक्तन के पद परसे,
निस दिन राम चरन चित लाया ॥ ४ ॥
(३)
सब कछु जीवत को ब्यौहार ।
मात पिता भाई सुत बांधव, अरु पुनि गृह की नार ॥१॥
तन तैं प्रान होत जब न्यारे, टेरत प्रेत पुकार ।
आध घरी कोऊ नहिँ राखै, घर तैं देत निकार ॥२॥