संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)
Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad
महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंशब्द संग्रह ४५
जो मैं जनितिउँ पिया रिसियै है ।
नाहक प्रीति लगाती न जग से ॥ २ ॥
निसु वासर पिय सँग मैं सूतिउँ ।
नैन अलसानी निकरि गये घर से ॥ ३ ॥
जस पनिहारि घरे सिर गागर ।
सुरति न टरै बतरावत१ सब से ॥ ४ ॥
धरमदास बिनवै कर जोरी ।
साहिब कबीर को पावै सुभग२ से ॥ ५ ॥
(४)
कैसे आरत करौँ तिहारी। महा मलिन गति देँह हमारी ॥
मैलहिँ तेँ उपज्यो संसारा। मैं कैसे गुन गावौँ तुम्हारा ॥
झरना झरै दसो दिसिद्वारे।कस ढिग आवौँ साहिब तुम्हारे॥
जो प्रभु देहु अगर की देँही। तब होवौँ मैं सबद सनेही ॥
मलयागिरि मैं बसत भुवंगा । विष अमृत रहै एकै संगा ॥
तिनुका तोड़ दिया परवाना। तब हम पायौ पद निर्बाना ॥
धरमदास कबीर बल गाजै। गुरु परताप आरती साजै ॥
(१) बात चीत करती है । (२) अच्छे भाग ।