सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad

महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा

DevanagariHindipublished267 पृष्ठ

पृष्ठ 50, कुल 267 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 50

शब्द संग्रह ४१
धरमदास बिनवै कर जोरी, सुनिये समरथ साँइयाँ ।
साहिब कबीर प्रभु मिले विदेही, झीना दरस दिखाइया ॥४॥
(५)
होली
हमरी उमिरिया होरी खेलन की ।
पिय मो सैं मिलि के बिछुरि गयो हो ॥ १ ॥
पिय हमरे हम पिय की पियारी ।
पिय बिच अंतर परि गयो हो ॥ २ ॥
पिया मिलैं तब जियौं मोरी सजनी ।
पिय बिन जियरा निकरि गयो हो ॥ ३ ॥
इत गोकुल उत मथुरा नगरी ।
बीच डगर पिय मिलि गयो हो ॥ ४ ॥
धरमदास बिरहिन पिय पाये ।
चरन कँवल चित गहि रह्यो हो ॥ ५ ॥
॥ कपट भक्ति ॥
साहिब यहि विधि ना मिलै, चित चंचल भाई ॥ टेक ॥
माला तिलक उरझाइ कै, नाचै अरु गावै ।
अपना मरम जानै नहीं, औरन समुझावै ॥ १ ॥
देखे को बक ऊजला, मन मैला भाई ।
आँखि मूँदि मौनी भया, मछरी धरि खाई ॥ २ ॥
कपट कतरनी पेट मँ, मुख बचन उचारी ।
अंतर-गति साहिब लखै, उन कहा छिपाई ॥ ३ ॥
आदि अंत की बारता, सतगुरु से पावै ।
कह कबीर धर्मदास से, मूरख समझावो ॥ ४ ॥
६