संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)
Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad
महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंशब्द संग्रह ४१
धरमदास बिनवै कर जोरी, सुनिये समरथ साँइयाँ ।
साहिब कबीर प्रभु मिले विदेही, झीना दरस दिखाइया ॥४॥
(५)
होली
हमरी उमिरिया होरी खेलन की ।
पिय मो सैं मिलि के बिछुरि गयो हो ॥ १ ॥
पिय हमरे हम पिय की पियारी ।
पिय बिच अंतर परि गयो हो ॥ २ ॥
पिया मिलैं तब जियौं मोरी सजनी ।
पिय बिन जियरा निकरि गयो हो ॥ ३ ॥
इत गोकुल उत मथुरा नगरी ।
बीच डगर पिय मिलि गयो हो ॥ ४ ॥
धरमदास बिरहिन पिय पाये ।
चरन कँवल चित गहि रह्यो हो ॥ ५ ॥
॥ कपट भक्ति ॥
साहिब यहि विधि ना मिलै, चित चंचल भाई ॥ टेक ॥
माला तिलक उरझाइ कै, नाचै अरु गावै ।
अपना मरम जानै नहीं, औरन समुझावै ॥ १ ॥
देखे को बक ऊजला, मन मैला भाई ।
आँखि मूँदि मौनी भया, मछरी धरि खाई ॥ २ ॥
कपट कतरनी पेट मँ, मुख बचन उचारी ।
अंतर-गति साहिब लखै, उन कहा छिपाई ॥ ३ ॥
आदि अंत की बारता, सतगुरु से पावै ।
कह कबीर धर्मदास से, मूरख समझावो ॥ ४ ॥
६