संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)
Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad
महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा
पृष्ठ 43, कुल 267 में से
संदर्भ में पढ़ें३४ शब्द संग्रह
(३)
अब कैसे छुटै नाम रट लागी ॥ टेक ॥
प्रभु जी तुम चंदन हम पानी ।
जा की अँग अँग बास समानी ॥१॥
प्रभु जी तुम घन बन हम मोरा ।
जैसे चितवत चंद चकोरा ॥२॥
प्रभु जी तुम दीपक हम बाती ।
जा की जोति बरै दिन राती ॥३॥
प्रभु जी तुम मोती हम धागा ।
जैसे सोनहिं मिलत सुहागा ॥४॥
प्रभु जी तुम स्वामी हम दासा ।
ऐसी भक्ति करै रैदासा ॥५॥
(४)
साची प्रीति हम तुम सँग जोड़ी। तुम सँग जोड़ि अवर सँग तोड़ी १
जौ तुम बादर तो हम मोरा। जौ तुम चंद हम भये चकोरा २
जौ तुम दीवा तो हम बाती। जौ तुम तीरथ तो हम जात्री ३
जहाँ जाउँ तहँ तुम्हरी सेवा । तुम सा ठाकुर और न देवा ४
तुम्हरे भजन कटे भव फाँसा। भक्ति हेतु गावै रैदासा ॥५॥
॥ साधु ॥
आज दिवस¹ लेऊँ बलिहारा ।
मेरे गृह आया राम का प्यारा ॥ टेक ॥
आँगन बँगला भवन भयो पावन ।
हरिजन बैठे हरिजस गावन ॥ १ ॥
करूँ डंडवत चरन पखारूँ ।
तन मन धन उन ऊपरि वारूँ ॥ २ ॥
(१) दिन ।