संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)
Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad
महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंरैदासजी ३३
(२)
रामा हो जग-जीवन मोरा ।
तूँ न बिसारी मैं जन तोरा ॥ टेक ॥
संकट सोच पोच दिन राती ।
करम कठिन मोरि जाति कुजाती ॥१॥
हरहु विपति भावै करहु सो भाव ।
चरन न छाड़ौँ जाव सो जाव ॥२॥
कह रैदास कछु देहु अवलंबन ।
बेगि मिलौ जनि करौ विलंबन ॥३॥
॥ प्रेम ॥
(१)
देहु कलाली एक पियाला, ऐसा अवधू है मतवाला ॥ टेक
हे हे कलाली तैं क्या किया, सिरका सातैँ प्याला दिया ॥१
कहै कलाली प्याला देऊँ, पीवनहारे का सिर लेऊँ ॥२॥
चंद सूर दोउ सनमुख होई, पीवै प्याला मरै न कोई ॥३॥
सहज सुन्न मैं भाठी सरवै, पीवै रैदास गुरुमुख दरवै ॥४॥
(२)
जौ तुम तोरौ राम मैं नहिँ तोरूँ ।
तुम सौँ तोरि कवन सौँ जोरूँ ॥ टेक ॥
तीरथ बरत न करूँ अँदेसा ।
तुम्हरे चरन कमल क भरोसा ॥१॥
जहँ जहँ जाउँ तुम्हरी पूजा ।
तुम सा देव और नहिँ दूजा ॥२॥
मैं अपनो मन हरि सौँ जोर्यौँ ।
हरि सौँ जोरि सबन से तोर्यौँ ॥३॥
सबही पहर तुम्हारी आसा ।
मन क्रम बचन कहै रैदासा ॥४॥
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