संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)
Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad
महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंनामदेवजी २६
बहुत सी कथाओं में तीन दिन उपास करके ठाकुर जी को दूध पिलाने की
कथा प्रसिद्ध है।
॥ नाम महिमा ॥
तत्त गहन को नाम है, भजि लीजे सोई।
लीला सिंध अगाध है, गति लखै न कोई ॥ १ ॥
कंचन मेरु सुमेरु, हय गज¹ दीजै दाना।
कोटि गऊ जो दान दे, नहिँ नाम समाना ॥ २ ॥
जोग जग्य तैँ कहा सरै, तीरथ व्रत दाना।
ओसै प्यास न भागिहै, भजिये भगवाना ॥ ३ ॥
पूजा करि साधू जनहिँ, हरि को पन धारी।
उन तैँ गोविंद पाइये, बे परउपकारी ॥ ४ ॥
एकै मन एकै दसा, एकै व्रत धरिये।
नामदेव नाम जहाज है, भवसागर तरिये ॥ ५ ॥
॥ समरथ ॥
बदौ क्यौँ ना होड़² माधो मो सैँ।
ठाकुर तैँ जन जन तैँ ठाकुर, खेल पर्यो है तो सैँ ॥१॥
आपन देव देहरा आपन, आप लगावै पूजा।
जल तैँ तरंग तरंग तैँ है जल, कहनसुनन को दूजा ॥२॥
आपहिँ गावै आपहिँ नाचै, आप बजावै तूरा।
कहत नामदेव तूँ मेरो ठाकुर, जन ऊरा³ तूँ पूरा ॥३॥
॥ लव ॥
अस मन लाव रामरसना। तेरा बहुरिन होइ जरा मरना॥१
जैसे मृगा नाद लव लावै। बान लगे वहि ध्यान लगावै ॥२
जैसे कीट भृंग मन दीन्ह। आपु सरीखे वा को कीन्ह ॥३॥
नामदेव भन⁴ दासनदास। अब न तजौँ हरिचरन निवास॥४
(१) घोड़ा और हाथी। (२) शर्त। (३) अधूरा। (४) कहता है।