संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)
Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad
महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२४६ शब्द संग्रह
मैं अति पत मत हीन दीन देखा मोहिँ साईँ ।
लीन्हा अंग लगाय कहूँ अस कौन बड़ाई ॥
तुलसी मैं अति हीन हूँ दीन्हा अगम अवास ।
बार बार बिनती करूँ सतगुरु चरन निवास ॥
॥ भेद ॥
(१)
रेख़ता
पैठ मन पैठ दरियाव दर आप मैं ।
कँवल बिच झाज¹ मैं कमठ राजै ॥
होत जहाँ सोर घनघोर घट मैं लखै ।
निरख मन मौज अनहद्द बाजै ॥
गगन की गिरा पर सुरत से सैल कर ।
चढ़ै तिल तोड़ घर अगम साजै ॥
दास तुलसी कहै पच्छिम के द्वार पर ।
साहिब घर अद्भुत बिराजै ॥
(२)
कुंडलिया
सुरत चढ़ि गई अकास मैं सोर भया ब्रह्मांड ॥
सोर भया ब्रह्मांड अंड मैं धधक चढ़ाई ।
जब फूटा असमान गगन मैं सहज समाई ॥
सुन्न सहर के बीच ब्रह्म से भया मिलापा ।
परभातम पद देख देख कर भया हुलासा ॥
तुलसी गति मति लखि पड़ी निरखि लखा सब अंड ।
सुरत चढ़ि गई अकास मैं सोर भया ब्रह्मांड ॥
(१) जहाज़ ।