संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)
Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad
महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंतुलसी साहिब (हाथरसवाले) २४५
बिन सतगुरु ब्याकुल हिये, जियरा धरत न धीर ।
पीर पिया बिन को हरै, तुलसी गगन गँभीर ॥ ८ ॥
(७)
ब्याकुल बिरह दिवानी, झड़ै नित नैनन पानी ॥ टेक ॥
हर दम पीर पिया की खटकै, सुधि बुधि बदन हिरानी ॥१॥
होस हवास नहीं कुछ तन मैं, बेदम जीव भुलानी ॥२॥
बहु तरंग चित चेतन नाहीं, मन मुरदे की बानी ॥३॥
नाड़ी बैद बिथा नहिं जानै, क्यौँ औषद् दे आनी ॥४॥
हिये मैं दाग जिगर के अंदर, क्या कहि दरद बखानी ॥५॥
सतगुरु बैद बिथा पहिचानैं, बूटी है उनकी जानी ॥६॥
तुलसी यह रोग रोगिया बूझै, जिस को पीर पिरानी ॥७॥
(८)
प्रीतम पीर पिरानी, दरद कोइ बिरले जानी ॥ टेक ॥
डसत भुवंग चढ़त सननननन, जहर लहर लहरानी ॥१॥
घनन घनन घन्नाटी आवै, भावै अन्न न पानी ॥२॥
भँवर चक्र की उठत घुमेरैं, फिरै दसो दिसि आनी ॥३॥
अंदर हाल बिहाल हलावत, दुरगम प्रीति निभानी ॥४॥
आसिक इसक इसक आसिक से, करना मौत निसानी ॥५॥
मुरदा है करि खाक मिली अब, जब पट अमर लिखानी ॥६॥
पिय को रोग सोग तन मन मैं, सतगुरु सुधि अलगानी ॥७॥
तुलसी यह मारग मुस्किल का, धड़ बिन सीस बिकानी ॥८॥
॥ विनय ॥
कुंडलिया
बार बार बिनती करूँ सतगुरु चरन निवास ॥
सतगुरु चरन निवास बास मोहिं दीन्ह लखाई ।
नित नित करूँ बिलास पास घर अपने आई ॥