संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)
Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad
महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंतुलसी साहिब (हाथरसवाले) २४३
तुलसी तत मत विलास पास प्रेम छाई ।
पाई घर धधक धीर रमक सी जनाई ॥ ५ ॥
(३)
मेरे दरद की पीर कसक किस से मैं कहूँ ॥ टेक ॥
ऐसा हकीम होय जोई जान दे दहूँ ।
खटकै कलेजे बीच बान तोर से सहूँ ॥ १ ॥
घायल की समझ सूर चूर घाव मैं रहूँ ।
हीये हवाल हाल गला काटि के लहूँ ॥ २ ॥
जैसे तड़पती मीन नीर पीर ज्योँ सहूँ ।
जैसे चकोर चंद चाह चित्त से चहूँ ॥ ३ ॥
सोची सुबह और साम पिया धाम कस गहूँ ।
तुलसी बिना मिलाप छुरी मार मर रहूँ ॥ ४ ॥
(४)
प्यारी पिया पीर खली आधी रतियाँ ॥ टेक ॥
सोवत समझ उठी अपने मैं । क्या कहूँ बरनि बिपतियाँ ॥१
चोली बन्द बदन बिच खटकै । उमँग उमँग फटै छतियाँ ॥२
रोवत रैन चैन नहिँ चित मैं । कूर करम की बतियाँ ॥३
तुलसी देस ऐस बिन पिय के । सोच लिखूँ कित पतियाँ ॥४
(५)
सावन
पिय बिन सावन सुख नहीं, हिये बिच उठत हिलोर ।
बोल बचन भावै नहीं, तन मन तड़पि अतोल ॥ १ ॥
पिय बिन बिरहन बावरी, जिय जस कसकत हूल ।
सूल उठै पति पीर की, धन संपत सुख धूल ॥ २ ॥
इत बैरी बदरा भये, गरजि घुमरि घनघोर ।
घुमरि घुमरि घर द्वार मैं, कूकै दादुर मोर ॥ ३ ॥