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सर्वकोश
संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad

महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा

DevanagariHindipublished267 पृष्ठ

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पलटू साहिब २३७
॥ मिश्रित ॥
(१)
कुंडलिया
बार बार बिनती करै, पलटूदास न लेइ ॥
पलटू दास न लेइ रहै कर जोरे ठाढ़ी ।
सरनागति मैं रहैँ सरन बिनु लागै गाढ़ी१ ॥
गोड़ दाबि मैं देउँ चरन धै सेवा करिहैँ ।
चौका देइहैँ लीपि बहुरि मैं पानी भरिहैँ ॥
पैँड़ा देउँ बुहारि सबन कै जूठ उठावौँ ।
जनि दुरियावहु मोहिँ रहै मैं इहवाँ पावौँ ॥
मुक्ति रहै द्वारे खड़ी लट से झाडू देइ ।
बार बार बिनती करै पलटूदास न लेइ ॥
(२)
कुंडलिया
बनिया पूरा सोई है जो तौलै सतनाम ॥
जो तौलै सतनाम छिमा का टाट बिछावै ।
प्रेम तराजू करै बाट बिस्वास बनावै ॥
बिबेक की करै दुकान ज्ञान का लेना देना ।
गादी है संतोष नाम का मारै टेना ॥
लादै उलदै भजन बचन फिर मीठे बोलै ।
कुंजी लावै सुरत सबद का ताला खोलै ॥
पलटू जिसकी बनि परी उसी से मेरा काम ।
बनिया पूरा सोई है जो तौलै सतनाम ॥
(१) गाढ़ = दुख ।