संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)
Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad
महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२३८ शब्द संग्रह
(३)
कुंडलिया
चिन्ता की लगी आग है जरै सकल संसार ॥
जरै सकल संसार जरत निरपति को देखा ।
बादसाह उमराव जरत हैं सैयद सेखा ॥
सुर नर मुनि सब जरैं जती जोगी सन्यासी ।
पंडित ज्ञानी चतुर जरैँ कनफटा उदासी ॥
जंगम सेवरा जरैँ जरैँ नागा बैरागी ।
कोउ न बचते आगि दुपहरी लागी आगी ॥
पलटू बचते संत जन जिन किया नाम आधार ।
चिन्ता की लगी आग है जरै सकल संसार ॥
(४)
अरिल
सब भैँड़ो की राह चले हैं जूटि१ के ।
आसिक बीर अकेल चला है फूटि के ॥
उलटि के खेलै खेल भया मन मगन मेँ ।
अरे हाँ पलटू छुटा भुइँचपा जाय एक ठो गगन में ॥
(५)
अरिल
खाला२ कै घर नाहिं भक्ति है नाम की ।
दाल भात है नाहिं खाये के काम की ॥
साहिब का घर दूर सहज ना जानिये ।
अरे हाँ पलटू गिरै तो चकनाचूर बचन को मानिये ॥
(६)
अरिल
माया ठगनी बड़ी ठगे यह जात है ।
बचै न या से कोऊ लगी दिन रात है ॥
कौड़ी नाहीं संग करोरनि जोरि कै ।
अरे हाँ पलटू गये हैं राजा रंक लँगोटो छोरि कै ॥
(१) झुंड के। (२) मौसी ।