संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)
Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad
महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२२२ शब्द संग्रह
यह लीजै दृष्टान्त सकै सो लेइ बिचारी ।
ऐसा करै सनेह ताहि की मैं बलिहारी ॥
पलटू ऐसी प्रीति करु जल औ मीन समान ।
जहाँ तनिक जल बीछुड़ै छोड़ि देत है प्रान ॥
(४)
कुंडलिया
मेरे तन तन लग गई पिय की मीठी बोल ॥
पिय की मीठी बोल सुनत मैं भई दिवानी ।
भँवर गुफा के बीच उठत है सोहं बानी ॥
देखा पिय का रूप रूप मैं जाय समानी ।
जब से भया मिलाप मिले पर ना अलगानी ॥
प्रीति पुरानी रही लिया हमने पहिचानी ।
मिली जोति मैं जोति सुहागिन सुरति समानी ॥
पलटू सबद के सुनत ही घूँघट डारा खोल ।
मेरे तन तन लग गई पिय की मीठो बोल ॥
(५)
कुंडलिया
मगन भई मेरी माइजी जब से पाया कन्थ ॥
जब से पाया कन्थ पन्थ सतगुरु बतलाया ।
सतगुरु बड़े दयाल करी उन मो पर दाया ॥
स्वस्ता१ मन मैं आइ छुटी मेरी दुचिताइ ।
सोऊँ कन्थ के साथ अंग से अंग लगाई ॥
अभ्यन्तर२ जागी प्रीत निरन्तर कन्थ से लागी ।
दरस परस के करत जगत की भ्रमना भागी ॥
पलटू सतगुरु सब्द सुनि हृदय खुला है ग्रन्थ ।
मगन भई मेरी माइजी जब से पाया कन्थ ॥
(१) शान्ति । (२) अंतर में।