संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)
Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad
महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपलटू साहिब २२१
अपने पिया को मैं बेगि मनैहौँ ।
सौ तक़सीर होत प्रभु जन से ॥ ३ ॥
सुनि मृदु बचन पिया मुसुकाने ।
पलटूदास पिय मिले बड़े तप से ॥ ४ ॥
(२)
प्रेम बान जोगी मारल हो, कसकै हिया मोर ॥ टेक ॥
जोगिया कै लालि लालि अँखियाँ हो, जस कँवल कै फूल ।
हमरी सुरख़ चुनरिया हो, दूनौँ भये तूल¹ ॥ १ ॥
जोगिया कै लेउँ मिर्गछलवा हो, आपन पट चीर ।
दूनौँ कै सियब गुदरिया हो, होइ जाबै फ़कीर ॥ २ ॥
अगना मैं सिँगिया बजाइन्हि हो, ताकिन्हि मोरी ओर ।
चितवन मैं मन हरि लियो हो, जोगिया बड़ चोर ॥ ३ ॥
गंग जमून के बिचवाँ हो, बहै झिरहिर नीर ।
तेहि ठैयाँ जोरल सनेहिया हो, हरि लै गयो पीर ॥ ४ ॥
जोगिया अमर मरै नहिँ हो, पुजवल मोरी आस ।
करम लिखा बर पावल हो, गावै पलटूदास ॥ ५ ॥
(३)
कुंडलिया
जहाँ तनिक जल बीछुड़ै छोड़ि देत है प्रान ॥
छोड़ि देत है प्रान जहाँ जल से बिलगावै ।
देइ दूध मैं डारि रहै ना प्रान गँवावै ॥
जा को वही अहार ताहि को का लै दीजै ।
रहै ना कोटि उपाय और सुख नाना कीजै ॥
(१) तुल्य = बराबर ।