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सर्वकोश
संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad

महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा

DevanagariHindipublished267 पृष्ठ

पृष्ठ 229, कुल 267 में से

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२२० शब्द संग्रह
॥ बिरह ॥
जेकरे अँगने नौरँगिया, सो कैसे सोवै हो ।
लहर लहर बहु होय, सबद सुनि रोवै हो ॥ १ ॥
जेकर पिय परदेस, नींद नहिं आवै हो ।
चौँकि चौँकि उठै जागि, सेज नहिं भावै हो ॥ २ ॥
रैन दिवस मारै बान, पपीहा बोलै हो ।
पिय पिय लावै सोर, सवति होइ डोलै हो ॥ ३ ॥
बिरहिनि रहै अकेल, सो कैसे कै जीवै हो ।
जेकरे अमी कै चाह, जहर कस पीवै हो ॥ ४ ॥
अभरन देहु बहाय, बसन धै फारौ हो ।
पिय बिनु कौन सिंगार, सीस दै मारौ हो ॥ ५ ॥
भूख न लागै नींद, बिरह हिये करकै हो ।
माँग सेंदुर मसि पोछ१, नैन जल ढरकै हो ॥ ६ ॥
का पर२ करै सिंगार, सो काहि दिखावै हो ।
जेकर पिय परदेस, सो काहि रिझावै हो ॥ ७ ॥
रहै चरन चित लाइ, सोई धन आगर हो ।
पलटुदास कै सबद, बिरह कै सागर हो ॥ ८ ॥
॥ प्रेम ॥
(१)
गाँठि परी पिय बोले न हम से ॥ टेक ॥
निस दिन जागौं मैं पिया की सेजिया ।
नैना अलसाने निकरि गे घर से ॥ १ ॥
जो मैं जनतिउँ पिय रिसियैहैं ।
काहे को प्रीति लगातिउँ अस ठग से ॥ २ ॥
(१) माँग का सेंदुर और आँख का काजल दोनों पोछ डाले जायें । (२) किस
के लिये ।