संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)
Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad
महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपलटू साहिब
(४)
कुंडलिया
माया की चक्की चलै पीसि गया संसार ॥
पीसि गया संसार बचै ना लाख बचावै ।
दोऊ पट के बीच कोऊ ना साबित जावै ॥
काम क्रोध मद लोभ चक्की के पीसनहारे ।
निरगुन डारै झींक¹ पकरि कै सबै निकारे ॥
दुरमति बड़ी सयानि सानि कै रोटी पोवै ।
करम तवा मैं धरि सैँकि कै साबित होवै ॥
तृस्ना बड़ी छिनारि जाइ उन सब घर घाला।
काल बड़ा बरियार किया उन एक निवाला ॥
पलटू हरि के भजन बिनु कोऊ न उतरै पार ।
माया की चक्की चलै पीसि गया संसार ॥
॥ ध्यान ॥
कुंडलिया
कमठ दृष्टि जो लावई सो ध्यानी परमान ॥
सो ध्यानी परमान सुरत से अंडा सेवै ।
आपु रहै जल माहिँ सूखे मैं अंडा देवै ॥
जस पनिहारी कलस भरे मारग मैं आवै ।
कर छोड़े मुख वचन चित्त कलसा मैं लावै ॥
फनि मनि धरै उतारि आप चरने को जावै ।
वह गाफिल ना पड़े सुरत मनि माहिँ रहावै ॥
पलटू सब कारज करै सुरत रहै अलगान ।
कमठ दृष्टि जो लावई सो ध्यानी परमान ॥
(१) मुट्ठी मुट्ठी अनाज जो चक्की में डालते हैं ।