संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)
Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad
महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२१६ शब्द संग्रह
(२)
कुंडलिया
जीव कहा सुख पावई बेमुख बहु घर माहिँ ॥
बेमुख बहु घर माहिँ एक तैं एक अपर्बल ।
तेहू तैं हैं अधिक अधिक तैं अधिक महाबल ॥
तेहि मैं मन अरु पवन त्रिगुन कै डोरि लगाई ।
बाँधे सब जग जाल छुटै कोऊ नहिँ पाई ॥
जौ भीखा सुमिरै राम को तौ सकल अर्थ होइ जाहि।
जीव कहा सुख पावई बेमुख बहु घर माहिँ ॥
पलटू साहिब
[ संक्षिप्त जीवन-चरित्र के लिये देखो संतवानी संग्रह भाग १ पृष्ठ २१३]
॥ नाम ॥
अरिल
जो कोइ चाहै नाम तो नाम अनाम है ।
लिखन पढ़न मैं नाहिँ निअच्छर काम है ॥
रूप कहौँ अनरूप पवन अनरेख ते ।
अरे हाँ पलटू गैब दृष्टि से संत नाम वह देखते ॥
॥ शब्द ॥
फूटि गया असमान सबद की धमक मैं ।
लगी गगन मैं आग सुरति की चमक मैं ॥
सेसनाग औ कमठ लगे सब काँपने ।
अरे हाँ पलटू सहज समाधि कि दसा खबर नहिँ आपने ॥
॥ चितावनी ॥
(१)
कहवाँ से जिव आये, कहवाँ समाने हो साधो ।
का देखि रहेउ भुलाय, कहाँ लिपटाने हो साधो ॥१॥