संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)
Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad
महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा
पृष्ठ 222, कुल 267 में से
संदर्भ में पढ़ेंबचन मेटि मैं कहौँ गरज वसि, दरदवंदप्रभुकुरैनगोसो१॥३
हो करता करमनके दाता, आगे बुधि आवत नहिँ होसो॥४
तुम अंतरजामी सब जानो, भीखा कहा करहि अपसोसो॥५
(४)
मोहिँ राखो जी अपनी सरन ॥ टेक ॥
अपरम्पार पार नहिँ तेरो, काह कहौँ का करन ॥१॥
मन क्रम बचन आस इक तेरी, होउ जनम या मरन ॥२॥
अबिरल भक्ति के कारन तुम पर, ह्वै ब्राम्हन देउँ धरन२ ॥३॥
जन भीखा अभिलाख इहो, नहिँ चहौँ मुक्ति गति तरन ॥४॥
॥ अद्वैत ॥
कवित
खुद एक भुम्मि३ आहि, बासन४ अनेक ताहि,
रचना विचित्र रंग, गढ़ेउ कुम्हार है ।
नाम एक सोन आस५, गहना ह्वै द्वैत भास,
कहूँ खरा खौँट रूप, हेमहिँ६ अधार है ॥
फेन बुदबुद अरु लहरि तरंग बहु,
एक जल जानि लीजै, मीठा कहूँ खार है ।
आतमा त्यौँ एक जाते७, भीखा कहै याहि मते,
ठग सरकार के, बटोही८ सरकार के ॥
॥ साध महिमा ॥
भजन तैँ उत्तम नाम फकीर ।
छिमा सील संतोष सरल चित, दरदवंद पर-पीर ॥टेक॥
कोमल गदगद गिरा६ सुहावन, प्रेम सुधा रस छीर ।
अनहद नाद सदा फल पायो, भोग खाँड़ घृत खीर ॥१॥
(१) गुस्सा । (२) धरना । (३) मिट्टी । (४) बरतन । (५) असल । (६) सोना ।
(७) एक ही जाति की । (८) मुसाफ़िर । (६) वानी ।