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सर्वकोश
संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad

महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा

DevanagariHindipublished267 पृष्ठ

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पृष्ठ 217

२०८ शब्द संग्रह
कुंडलिया
(२)
जौ भल चाहो आपनो, तौ सतगुरु खोजहु जाइ ॥
सतगुरु खोजहु जाइ, जहाँ वै साहिब रहते ।
निसि दिन इहै बिचार, सदा हरि को गुन कहते ॥
समुझै बूझि विचारि कै, तन मन लावै सेव ।
कृपा करहिँ तब रीझि कै, नाम देहिँ गुरुदेव ॥
भीखा बिछुरे जुगन के, पल महँ देहिँ मिलाइ ।
जौ भल चाहो आपनो, तौ सतगुरु खोजहु जाइ ॥
॥ अनहद शब्द ॥
धुनि बजत गगन महँ बीना, जहँ आपु रास रस भीना ॥टेक
भेरी१ ढोल संख सहनाई, ताल मृदंग नवीना ।
सुर जहाँ बहुतै मौज सहज उठि, परत है ताल प्रबीना ॥१॥
बाजत अनहद नाद गहागह, धुधुकि धुधुकि सुर झीना ।
अँगुरी फिरत तार सातहुँ पर, लय निकसत भिन भीना२ ॥२
पाँच पचीस बजावत गावत, निर्त बारु३ छबि दीन्हा ।
उघटत तननन ध्रितां ध्रितां, कोउ ताथेइ थेइ तत कीन्हा ३
बाजत ताल तरँग बहु, मानो जंत्री जंत्र कर लीन्हा ।
सुनत सुनत जिव थकित भयो, मानो है गयो सबद अधीना ४
गावत मधुर चढ़ाय उतारत, रुनझुन रुनझुन धीना४ ।
कटि किंकिनि पगु नूपुर की छबि, सुरति निरति लौलीना ५
आदि सबद ओंकार उठतु है, अटुट रहत सब दीना५ ।
लागी लगन निरंतर प्रभु सैँ, भीखा जल मन भीना ॥६॥
(१) एक बाजे का नाम । (२) भिन्न भिन्न या भाँति भाँति की । (३) सुन्दर ।
(४) ताधिन ताधिन । (५) सब दिन यानी सदा एक रस रहता है ।