संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)
Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad
महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा
DevanagariHindipublished267 पृष्ठ
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सौहं डोरी मूल गहि बाँधो, मानिक बरत लिलार ।
कह गुलाल सतगुरु घर पायो, भरो है मुक्ति भंडार ॥४॥
(२)
बसंत
मन मधुकर खेलत बसंत ।
बाजत अनहद गति अनंत ॥ १ ॥
बिगसत कमल भयो गुंजार ।
जोति जगमग करि पसार ॥ २ ॥
निरखि निरखि जिय भयो आनंद ।
बाझल¹ मन तहँ परल फंद ॥ ३ ॥
लहरि लहरि बहै जोति धार ।
चरन कमल मन मिलो हमार ॥ ४ ॥
आवै न जाइ मरै नहिँ जीव ।
पुलकि पुलकि रस अमिय पीव ॥ ५ ॥
अगम अगोचर अलख नाथ ।
देखत नैनन भयो सनाथ ॥ ६ ॥
कह गुलाल मोरी पुजलि आस ।
जम जीत्यो भयो जोति बास ॥ ७ ॥
॥ उपदेश ॥
(१)
हरि नाम न लेहु गँवारा हो ।
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