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संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad

महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा

DevanagariHindipublished267 पृष्ठ

पृष्ठ 213, कुल 267 में से

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पृष्ठ 213

२०४ शब्द संग्रह
यह मन चंचल चोर है, निस वासर धावै ।
काम क्रोध मैं मिलि रह्यो, ईहै मन भावै ॥२॥
करुनामय किरपा करहु, चरनन चित लावै ।
सतसंगति सुख पाइ कै, निसु वासर गावै ॥३॥
अबकि बार यह अंध पर, कछु दाया कीजै ।
जन गुलाल बिनती करै, अपनो करि लीजै ॥४॥
(२)
प्रभुजी बरषा प्रेम निहारी ।
ऊठत बैठत छिन नहिं बीतत, याही रीति तुम्हारी ॥१॥
समय होय भा असमय होवै, भरत न लागत बारी ।
जैसे प्रीति किसान खेत साँ, तैसे है जन प्यारी ॥२॥
भक्त-बछल है बान तिहारी, गुन औगुन न बिचारी ।
जहँ जहँ जावैँ नाम गुन गावत, जम को सोच निवारी ॥३॥
सोवत जागत सरन धरम यह, पुलकित मनहिँ बिचारी ।
कह गुलाल तुम ऐसा साहिब, देखत न्यारी न्यारी ॥४॥
॥ भेद ॥
(१)
उलटि देखो, घट मैं जोति पसार ।
बिनु बाजे तहँ धुनि सब होवै, बिगसि कमल कचनार ॥१॥
पैठि पताल सूर ससि बाँधौ, साधौ त्रिकुटी द्वार ।
गंग जमुन के वार पार बिच, भरतु है अमिय करार ॥२॥
इंगला पिंगला सुखमन सोधो, बहत सिखर-मुख¹ धार ।
सुरति निरति ले बैठु गगन पर, सहज उठै झनकार ॥३॥
(१) ऊँचे की ओर ।