संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)
Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad
महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२०२ शब्द संग्रह
अष्ट कमल मँ जीव बसतु है, द्वादस मैं गुरु दरस करै ।
सोरह ऊपर बानि उठतु है, दुइ दल अमी झरै ॥२॥
गंगा जमुना मिली सरसुती, पदुम झलक तहँ करै ।
पच्छिम दिसा ह्वै गगन मँडल मैं, काल बली सों लरै ॥३॥
जम जीतो है परम पद पायो, जोती जगमग बरै ।
कह गुलाल सोइ पूरन साहिब, हर दम मुक्ति फरै ॥४॥
॥ प्रेम ॥
(१)
अबिगत जागल हो सजनी ।
खोजत खोजत सतगुरु पावल,
ताहि चरनवाँ चितवा लागल हो सजनी ॥टेक॥
साँझि समय उठि दीपक बारल,
कटल करमवा मनुवाँ पागल¹ हो सजनी ॥ १ ॥
चललि उबटि बाट छुटलि सकल घाट,
गरजि गगनवा अनहद बाजल हो सजनी ॥ २ ॥
गइली अनँदपुर भइली अगम सूर,
जितली मैदनवाँ नेजवा गाड़ल हो सजनी ॥ ३ ॥
कहै गुलाल हम प्रभुजी पावल,
फरल लिलरवा पपवा भागल हो सजनी ॥ ४ ॥
(२)
जो पै कोई प्रेम को गाहक होई ।
त्याग करै जो मन की कामना, सीस दान दै सोई ॥१॥
और अमल की दर जो छोड़ै, आपु अपन गति जोई ।
हर दम हाजिर प्रेम पियाला, पुलकि पुलकि रस लेई ॥२॥
(१) पगा या लीन हुआ ।